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फिटकरी

By Anand Dubey March 10, 2021

फिटकरी

हर घर में बहुत सामान्य रूप से फिटकरी का प्रयोग किया जाता है। अधिकांश लोगों को फिटकरी का नाम सुनते ही शेविंग के बाद इस्तेमाल की जाने वाली फिटकरी याद आती है। पर फिटकरी के यूज इससे कईं ज्यादा हैं।

असल में यह एक ऐसा पदार्थ  है, जो पानी को स्वच्छ बनाने से लेकर स्किन में चमक लाने जैसे कार्यों में मदद करती है। रंग के आधार पर लाल और सफेद फिटकरी को सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जाता है। 

क्या है फिटकरी? 

फिटकरी एक रंगहीन और पारदर्शी पदार्थ है। जो क्रिस्टल या दानेदान पाउडर के रूप में पाई जाती है। इसका स्‍वाद कसैला और हल्का मीठा होता है। इसे अंग्रेजी में एलम और साइंटिफिक भाषा में पोटैशियम एल्यूमीनियम सल्फेट कहा जाता है। साबुत नमक की तरह दिखने वाले इस पत्थर में कई औषधीय गुण होते हैं। जिसके कारण इसे चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत अहम माना गया है। 

आयुर्वेद में फिटकरी को सौराष्‍ट्री और फितकारी कहा जाता है। इसका उपयोग तमाम उपचारों के लिए किया जाता है। क्योंकि इसमें पीड़ाहर (दर्द हटाने वाला), ज्वरनाशक (बुखार उतारने वाला), होमियोस्टैटिक, डिटर्जेंट, संक्षारक, उत्तेजक और चिड़चिड़ाहट को दूर करने वाले गुण होते हैं। इसके अतिरिक्त यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है।

फिटकरी में पाए जाने वाले औषधीय गुण;

  • एंटीबायोटिक (सूक्ष्म जीवों को खत्म करने वाला)
  • एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन को कम करने वाला)
  • एस्ट्रिंजेंट (संकुचन पैदा करने वाला)
  • एंटी-ट्राइकोमोनस (प्रोटोजोआ इन्फेक्शन को कम करने वाला)
  • एंटीऑक्सीडेंट (मुक्त कणों के प्रभाव को नष्ट करने वाला)

फिटकरी के प्रकार और उनका इस्तेमाल;

पोटैशियम एलम-
पोटैशियम एलम को पोटाश एलम और पोटैशियम एलम सल्फेट भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल पानी को साफ करने के लिए किया जाता है।

अमोनियम एलम-
अमोनियम एलम एक सफेद क्रिस्टलीय पत्थर होता है। इसका प्रयोग आफ्टर शेव लोशन और हाथों से जुड़े प्रोडक्टों और व्यक्तिगत देखभाल संबंधी उत्पादों के निर्माण के लिए किया जाता है।

क्रोम एलम-
यह भी फिटकरी का ही प्रकार है। इसे क्रोमियम पोटैशियम सल्फेट भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल चमड़ा बनाने वाली प्रक्रिया में होता है।

सोडियम एलम-
यह फिटकरी का अकार्बनिक (Inorganic) कंपाउंड है। इसको सोडा-एलम भी कहा जाता है। इसका प्रयोग बेकिंग पाउडर बनाने और फूड एडिटिव के लिए किया जाता है। इसलिए इसे खाने वाली फिटकरी भी बोला जाता है।

सेलेनेट एलम-
यह भी फिटकरी का ही प्रकार है बस इसमें सल्फर की जगह सेलेनियम मौजूद होता है। इसलिए इसे एंटी-सेप्टिक के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

एल्‍यूमीनियम सल्‍फेट-
इसे पेपरमेकर फिटकरी के रूप में भी जाना जाता है। पर तकनीकी रूप से यह फिटकरी नहीं है।

फिटकरी के फायदे;

दैनिक जीवन में फिटकरी सौंदर्य से लेकर गंभीर चोट, मांसपेशीय ऐंठन और मुंहासों जैसी कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्याओं को ठीक करने में फायदा करती है। चलिए जानते हैं फिटकरी के इसी तरह के कुछ अन्य फायदों के बारे में- 

दांतों के लिए बेहतर-

फिटकरी दांतों में होने वाले छेद या कैविटी को ठीक करने में मदद करती है। इसलिए इसका नियमित उपयोग दांतों के लिए अच्छा रहता है। इसके अतिरिक्त यह दांतों में लगने वाले कीड़े (Tooth worm) को भी दूर करती है। 

माउथवॉश के लिए उपयोगी-

टर्की के गाजी विश्वविद्यालय द्वारा की रिसर्च के अनुसार, फिटकरी दांतों पर जमा प्लाक को हटाने और लार में उपस्थित हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायता करती है। इसलिए इसको माउथवॉश के लिए उपयोगी माना गया है।

शरीर की दुर्गन्ध हटाने में सक्षम-

फिटकरी तन की दुर्गन्ध हटाने में भी लाभकारी मानी जाती है। इसमें एंटीबैक्टीरियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) गुण होता है। इसलिए पानी में इसको मिलाकर नहाने से तन की दुर्गन्ध पैदा करने वाले बैक्टीरिया खत्म होते हैं और शरीर की बदबू दूर होती है। फिटकरी के इसी गुण के कारण कई कंपनियां इसका इस्तेमाल डियोड्रेंट बनाने में करती हैं।

झुर्रियों और बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में सक्षम-

एनसीबीआई के शोध के अनुसार यह एक प्राकृतिक एस्ट्रिंजेंट है। जो त्वचा में कसाव लाकर बेजान, रूखी और लटकी त्वचा को ठीक करने में सहायता करती है। इसके इसी गुण के कारण कई कॉस्मेटिक क्रीम में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

जुओं से दिलाए आजादी-

यह बालों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। यह बालों को जुओं से आजादी दिलाने का काम करती है। इसके लिए फिटकरी का पेस्ट बनाकर स्कैल्प (खोपड़) पर लगाना होता है। 

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन में लाभकारी-

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) से जुड़ी समस्याओं में भी यह फायदा करती हैं। दरअसल फिटकरी एक स्ट्रांग एस्ट्रिंजेंट है, जो रक्तस्राव वाले हिस्से पर प्रभावी रूप से कार्य करती है। किसी संक्रमण के कारण मूत्राशय से होने वाले रक्तस्राव को रोकने में फिटकरी मदद करती है। इसलिए यह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन में भी लाभकारी सिद्ध होती है। बस कभी इसे सीधे प्राइवेट पार्ट पर न लगाएं। ऐसा करने से तेज जलन की समस्या हो सकती है। 

घाव के लिए सबसे बढ़िया औषधि-

यह को घाव भरने के लिए सबसे बढ़िया औषधि माना जाता है। इसके लिए फिटकरी को सीधे या पेस्ट के रूप में घाव पर एक से दो मिनट तक लगाकर रखें और उसके बाद पानी से धोएं। ऐसा करने से घाव पर मौजूद बैक्टीरिया मरते हैं और घाव जल्दी ठीक होता है।

मुंहासों के लिए फायदेमंद-

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ वूमेंस डर्मेटोलॉजी द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं। जो रोम छिद्रों में कसाव लाकर मुंहासों की समस्या को ठीक करते हैं। क्योंकि रोम छिद्रों के बड़े होने के कारण ही मुंहासों की समस्या उत्पन्न होती है। और फिटकरी इन रोम छिद्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

आंख के फोड़े के लिए असरदार-

आंख के फोड़े को ठीक करने के लिए यह एक बढ़िया उपाय है। इसके लिए फिटकरी और चंदन का पेस्ट बनाकर आंख के फोड़े पर लगाएं। इससे आंख पर प्रभावी असर पड़ता है और फोड़ा उसी दिन फूट जाता है। जिसके बाद आंखों को काफी आराम मिलता है। 

फिटकरी के नुकसान;

  • पोटैशियम एलम का अधिक प्रयोग त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
  • इसका अधिक सेवन पुरुषों में वीर्य और फ्रक्‍टोज (semen and fructose) के स्तर को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
  • इसका लंबे समय तक सेवन करना कैंसर और अल्‍जाइमर (भूलने की बीमारी) का कारण हो सकता है।
  • एलम का अधिक प्रयोग पेचिश (Dysentery) और त्वचा के सूखापन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
  • नाजुक त्वचा पर इसके कारण चकते और लाली जैसी समस्या हो सकती है।

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