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जानें, एंजाइना के प्रकार, कारण, लक्षण और घरेलू निदान

By Anand Dubey August 09, 2021

जानें, एंजाइना के प्रकार, कारण, लक्षण और घरेलू निदान

वर्तमान समय में गलत खान-पान एवं व्यस्त दिनचर्या के चलते लगभग हर तीसरा व्यक्ति हृदय संबंधित बीमारियों (Heart Diseases) का शिकार हो रहा है। जिसके कारण व्यक्ति अपने सेहत का ख्याल नहीं रख पाता और शुरूआती लक्षणों को नजरअंदाज करने लगता हैं। हमारा शरीर कुछ समय पहले ही हमें हार्ट अटैक (दिल का दौरा) के संकेत देना शुरू कर देता है। लेकिन हम व्यस्त दिनचर्या के चलते इसे नजरअंदाज कर देते हैं। जिसका परिणाम अक्सर जानलेवा साबित होता है। हार्ट अटैक आने से पहले सीने में जो दर्द उठता है, उसे एंजाइना  (Angina) कहा जाता है। जब दिल की नसों में रक्त प्रवाह ठीक तरह से नहीं हो पाता। जिससे हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। जिससे एंजाइना का दर्द जबड़े, बांह और पीठ के ऊपरी हिस्से में उत्पन्न होने लगता है।

एंजाइना क्या है?

एंजाइना कोरोनरी धमनी की बीमारी का एक लक्षण है। जब किसी व्यक्ति के दिल तक रक्त पहुंचाने वाली नसों में ब्लॉकेज हो जाता है या किसी भी कारण से दिल तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह (Blood Flow) धीमा पड़ जाता है। जिसके कारण सीने में दर्द या बेचैनी महसूस होती है। इसे ही एंजाइना कहते हैं। एंजाइना को मेडिकल भाषा में इस्केमिक चेस्ट पेन (Ischemic chest pain) कहा जाता है।

ब्लड के माध्यम से दिल तक ऑक्सीजन का संचार होता है। लेकिन कम मात्रा में ब्लड पहुंचने के कारण हार्ट तक ऑक्सीजन ठीक तरह से नहीं पहुंच पाती। जिसकी वजह से हार्ट ठीक से पंप नहीं कर पाता। ऐसे में दिल पर दबाव पड़ने लगता है और यह बाधित रक्त प्रवाह दिल की मांसपेशियों को कमजोर या पूरी तरह नष्ट कर देता है। इस दौरान व्यक्ति को दिल के दौरे पड़ सकते हैं। आमतौर पर, यह दर्द कुछ ही समय में ठीक हो सकता है। लेकिन कई बार यह काफी सारी परेशानियों का कारण भी बन सकता है।

एंजाइना के प्रकार-

स्टेबल एंजाइना (Stable Angina)-

यह एंजाइना का सबसे सामान्य प्रकार है। जो आवश्यकता से अधिक शारीरिक कार्य (Physical Activity) या अधिक तनाव लेने से होता है। हालांकि एंजाइना आराम करने और मेडिसिन लेने से ठीक हो जाता है।

अनस्टेबल एंजाइना (Unstable Angina)-

इसे एंजाइना के प्रकारों में सबसे गंभीर एवं खतरनाक माना जाता है। यह आराम करने या मेडिसिन लेने के बावजूद भी ठीक नहीं होता है। इसलिए इसे अनस्टेबल एंजाइना कहा जाता है। इस तरह के एंजाइना में काफी दर्द रहता है जो बार-बार होता है। ऐसी परिस्थिति में हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ सकता है। ऐसे में डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।

वेरिएंट एंजाइना (Varient Angina)-

वेरियंट एंजाइना काफी कम लोगों में देखने को मिलता है। यह समस्या आराम करने या सोते वक्त होता है। इस दौरान दिल की धमनियां अचानक सिकुड़ने लगती हैं। परिणामस्वरूप सीने में असहनीय दर्द होने लगता है। जिसे दवा से ठीक किया जा सकता है।

माइक्रो वैस्कुलर एंजाइना (Micro Vascular Angina)-

माइक्रो वैस्कुलर एंजाइना का अन्य प्रकार होता है। जब किसी व्यक्ति के दिल की सबसे छोटी धमनी में ब्लॉकेज उत्पन्न होने लगता है। जिसके कारण यह सही तरीके से काम नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप दिल तक आवश्यक मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता। यह समस्या ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलती है।

एंजाइना के लक्षण-

  • सीने में असहनीय दर्द होना।
  • बेचैनी महसूस करना।
  • हार्ट बर्न की समस्या महसूस करना।
  • बांहों, गर्दन, जबड़े ( jaw), कंधे और पीठ में दर्द होना।
  • चक्कर आना।
  • थकान महसूस करना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।
  • कमजोरी महसूस करना।
  • बार-बार पसीना आना।
  • जी मिचलाना या उल्टी होना।
  • खट्टी डकार आना।

एंजाइना होने के कारण-

एंजाइना होने के कई कारण होते हैं जिनमें से मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

धमनी में प्लाक का जमना (Arterial Plaque)-

धमनी में प्लाक का होना एंजाइना होने का मुख्य कारण होता है। इसमें धमनियों (Arteries) के भीतर प्लाक जम जाता है। जो ब्लॉकेज को जन्म देता है। यह ब्लॉकेज वसा (तरल पदार्थ), कॉलेस्ट्रॉल और अन्य तत्वों की कुछ मात्रा धमनियों की दीवार पर एकत्र होकर धमनी को संकुचित कर देती हैं। जिससे दिल में ब्लड सर्कुलेशन होने में परेशानी आती है। कारणवश सीने में दर्द और बेचैनी होने लगती है। यहां से हार्ट अटैक के खतरे की शुरूआत होती है। हालांकि इसका इलाज कोरोनरी एंजियोप्लास्टी नामक सर्जरी के द्वारा किया जा सकता है।

धूम्रपान करना-

ऐसे व्यक्ति को एंजाइना होने की संभावना अधिक रहती है, जो अधिक मात्रा में धूम्रपान करता है।

कॉलेस्ट्राल का अधिक मात्रा में होना- 

शरीर में कॉलेस्ट्राल की मात्रा अधिक होने पर भी एंजाइना का खतरा बढ़ जाता है।

उच्च रक्तचाप का होना-

एंजाइना उच्च रक्तचाप के कारण भी हो सकता है। इसलिए बी.पी की समस्या से ग्रस्त लोगों को उच्च रक्तचाप का इलाज जरूर कराना चाहिए।

तनाव पूर्ण जीवन-

ऐसा माना जाता है कि ज्यादा तनाव लेना भी कई बार एंजाइना या हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी को जन्म देता है। क्योंकि ऐसे में हम अपने स्वास्थ्य को नजर अंदाज करने लगते हैं।

डायबिटीज-

डायबिटीज यानी हाई शुगर एक समय के बाद हार्ट की नसों को डैमेज करने लगता है। इसके कारण भी एंजाइना हो सकता है।

एंजाइना से बचने के उपाय-

  • तैलीय एवं वसायुक्त भोजन का सेवन कम-से कम करें। इनका ज्यादा सेवन धमनियों के ऊपर एक परत के रूप में जम जाता है। जिससे रक्त के प्रवाह में रुकावट या अवरोध होता है।
  • मीठा का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है। इससे रक्त के थक्के बन सकते हैं या रक्त गाढ़ा हो सकता है। जो आगे चलकर शरीर के लिए घातक साबित होता है।
  • उन बिमारियों का इलाज सबसे पहले करें। जो एंजाइना के खतरे को बढ़ाती हैं जैसे मधुमेह, उच्च रक्त चाप, और रक्त में उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि।
  • चिंता, तनाव एवं अवसाद से बचें।
  • प्रतिदिन 7-8 घंटे की नींद लें।
  • धूम्रपान या अल्कोहल का सेवन बिल्कुल न करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • संतुलित आहार का सेवन करें।

एंजाइना का ईलाज-

ईसीजी कराना- 

ईसीजी के द्वारा दिल की धड़कनों की स्थिति का पता लगाया जाता है। इसलिए हृदय संबंधी कोई दिक्कत होने पर इससे उसका पता लगाया जा सकता है।

दवाइयां लेना- 

टेस्ट कराने के अलावा एंजाइना का इलाज कुछ दवाईयों के द्वारा भी किया जा सकता है।

बाईपास सर्जरी कराना-

एंजाइना का इलाज बाईपास सर्जरी के द्वारा भी किया जा सकता है। इस सर्जरी में हार्ट की नसों में हुई ब्लॉकेज को खोल कर दिल तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह को ठीक किया जाता है।

एंजियोप्लास्टी-

एंजियोप्लास्टी को पीसीआई (percutaneous coronary intervention) भी कहा जाता है। इस सर्जरी में एक छोटा गुब्बारा, संकुचित कोरोनरी धमनी में डाला जाता है। अब इस संकुचित धमनी को चौड़ा करने के लिए गुब्बारे को फुलाया जाता है। तत्पश्चात धमनी को चौड़ा रखने के लिए एक छोटा तार का जाल (stent) डाला जाता है। ऐसा करने से दिल में रक्त के आवागमन में सुधार होता है। इस प्रकार एंजियोप्लास्टी, एंजाइना के इलाज का एक अच्छा तरीका है।

कोरोनरी एंजियोग्राफी-

जब एंजाइना का उपचार कई तरीकों से ठीक नहीं हो पाता। तब डॉक्टर मरीज को कोरोनरी एंजियोग्राफी कराने की सलाह देते हैं। कोरोनरी एंजियोग्राफी के दौरान दिल की रक्त वाहिकाओं के अंदर की जांच करने के लिए, एक्स-रे इमेजिंग (छबि) का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को कार्डियक कैथीटेराइजेशन (cardiac catheterization) कहा जाता है।

एंजाइना को ठीक करने एवं इससे बचने के घरेलू उपाय-

एंजाइना का मुख्य कारण हार्ट ब्लॉकेज है। जिसे खोलने के लिए इन घरेलू तरीकों का प्रयोग लाभदायक होता है।

अर्जुन वृक्ष की छाल-

हार्ट से जुड़ी बीमारियों जैसे कि आर्टरी में ब्लॉकेज, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और कोरोनरी धमनी की बीमारी (Coronary artery disease) के इलाज में अर्जुन वृक्ष की छाल बेहद फायदेमंद होती है। क्योंकि इसकी छाल में प्राकृतिक ऑक्सिडाइजिंग होता है। इसी कारण हार्ट अटैक से बचने के उपाय में अर्जुन वृक्ष की छाल से बने काढ़े का औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।

नींबू पानी-

नींबू विटामिन-सी से भरपूर एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट है। यह रक्तचाप में सुधार लाने और धमनियों की सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, नींबू ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और धमनियों को साफ करने में भी सहायता करता है। इसके लिए गुनगुने पानी के एक गिलास में थोड़ा-सा शहद, काली मिर्च पाउडर और एक नींबू का रस मिलाकर मिश्रण बना लें। अब इस मिश्रण को रोजाना दिन में एक या दो बार पिएं।

लहसुन है फायदेमंद-

लहसुन बंद धमनियों को साफ करने के लिए सबसे अच्छे उपायों में से एक है। यह रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और रक्त संचार में सुधार करता है। इसके लिए कुछ लहसुन की कली को काटकर एक कप दूध में मिलाकर उबालकर थोड़ा ठंडा कर लें। अब इसे सोने से पहले पिएं।

अनार का जूस-

अनार में फाइटोकेमिकल्स पाया जाता है। जो एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में धमनियों की परत को क्षतिग्रस्त होने से रोकता है। इसके लिए प्रतिदिन एक गिलास  अनार के रस का सेवन करें। इस प्रकार धमनियां ब्लॉकेज के लक्षणों से राहत पाने में भी अनार फायदेमंद होता है।

लाल मिर्च का सेवन-

लाल मिर्च में मौजूद कैप्सेसिन नामक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल से दिल को बचाता है। यह रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। जो धमनियों के बंद होने का मुख्य कारण हैं। इसके अलावा यह ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करके दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे को भी कम करता है। इसके लिए गर्म पानी के एक कप में आधा या एक चम्मच लाल मिर्च मिला लें। अब इस मिश्रण को कुछ दिनों के लिए नियमित रूप से सेवन करें।

 

 

 


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