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मक्का के पोषक तत्व और फायदे

By Anand Dubey June 19, 2021 0 comments

बरसात के मौसम में लगभग हर किसी को भुना हुआ भुट्टा खाना पसंद होता है। भुट्टे को अंग्रेजी में कॉर्न और हिंदी में मक्का कहा जाता है। मक्का आहार के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला एक विशेष प्रकार का खाद्य पदार्थ है। जिसे दुनिया के लोकप्रिय अनाजों में गिना जाता है। कई देशों में मक्का भोजन का मुख्य रूप है। भारत में भी कई जगहों पर मक्के की रोटियों को बेहद पसंद किया जाता है। मक्का को पोषण के हिसाब से भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। अपने औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी इसका इस्तेमाल विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। मक्का वजन कम करने, निम्‍न रक्‍तचाप को ठीक करने, मधुमेह को कम करने और जन्म के वक्त तंत्रिका ट्यूब दोष आदि को कम करने में लाभकारी साबित होता है। वहीं भुने हुए भुट्टे के स्वास्थ्य लाभ और भी अधिक हैं।

क्या है मक्का (कॉर्न)?

मक्के की गिनती मोटे अनाजों में होती है। भारत में इसका सेवन अधिकांश भुट्टे के रूप में किया जाता है। मक्के की खेती मैदानी भागों से लेकर लगभग 2700 मीटर ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों तक होती है। भुट्टा अर्थात मक्के का वैज्ञानिक नाम जी-मेज (Zea mays) है। भारत में इसकी खेती बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर होती है। अगर विश्व की बात करें, तो ब्राजील, चीन, अमेरिका और मैक्सिको जैसे देशों में इसकी अच्छी खेती की जाती है।

मक्का के पोषक तत्‍व-

मक्का में अधिक मात्रा में कैलोरी होती है। जो स्वस्थ रहने और दैनिक चयापचय के लिए बहुत जरूरी होती है। इसके अलावा मक्का को विटामिन ए, बी, ई और कई खनिजों का संपन्न स्रोत भी माना जाता है। साथ ही इसमें प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्र भी मौजूद होते हैं। मक्का में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जो बवासीर, कब्ज और कोलोरेक्‍टल कैंसर जैसे पाचन रोगों को रोकने और खत्म करने का काम करता है। वहीं इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-कैंसरजन्य एजेंट के रूप कार्य कर, अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) जैसी दिमागी बीमारी को ठीक करने में भी मदद करते हैं।

भुट्टा (कॉर्न) या मक्का के फायदे;

पाचन के लिए-

पाचन शक्ति में सुधार करने में भुट्टे का सेवन सकारात्मक प्रभाव दिखाता है। दरअसल मक्का में विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है। जो पाचन तंत्र में सुधार कर, कब्ज की परेशानी को खत्म करता है। इस आधार मकई का सेवन, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायता करता है।

वजन कम करने के लिए-

मक्का में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है। जो पेट के मोटापे को नियंत्रित रखने का काम करता है। दरअसल मक्का शरीर में फैट को जमने नहीं देता। परिणामस्वरूप मोटापा नहीं बढ़ पाता। वहीं अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के अनुसार, मेसिन नामक रसायन से भरपूर कॉर्न सिल्क (भुट्टे पर मौजूद हल्के रेशेदार बाल) का अर्क भी वजन को कम करने में मदद करता है। इसलिए वजन घटाने के लिए भुट्टे को एक अच्छे विकल्प के तौर पर देखा जाता है।

कोलेस्ट्रॉल के लिए-

मक्का बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करने में मददगार साबित होता है। मकई से संबंधित एक रिसर्च रिपोर्ट में इस बात के संकेत मिलते हैं कि मक्के के तेल में लिनोलेइक एसिड पाया जाता है। जो बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कम कर, उसे नियंत्रित करने में सहायता करता है।

डायबिटीज के लिए-

एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के एक शोध के मुताबिक मक्का में कुछ ऐसे तत्व मौजूद होते हैं। जो शरीर में इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाने का काम करते हैं। वहीं एक अन्य रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार मक्के का नियमित सेवन, टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के ब्लड शुगर में असरदार कमी करता है। इस संबंध में कुछ विशेषज्ञ भी कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन और प्रोटीन से संपन्न होने के कारण मधुमेह में मक्के का सेवन करने की सलाह देते हैं।

हृदय स्वास्थ्य के लिए-

एक शोध के मुताबिक भुने हुए मक्का के दानों (पॉपकॉर्न) को फेनोलिक यौगिक एंटीऑक्सीडेंट गुण से भरपूर माना जाता है। जो हृदय रोग और हाई बीपी में राहत पहुंचाने का काम करते हैं। इसलिए लंबे समय तक हृदय को स्वस्थ के लिए मक्का को अच्छा उपाय माना जाता है।

आंखों के लिए-

आंखों से संबंधित एक शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि उम्रदराज (Old age) वाले लोगों में एंटीऑक्सीडेंट, ल्यूटिन और जैक्सैन्थिन जैसे यौगिकों की कमी होने से आंखों की नसों में शिथिलता (ढीलापन) आने लगता है। जो आगे चलकर कमजोर आंखें, कम दिखाई देना और अंधेपन जैसी परेशानियों का कारण बनता है। चूंकि मक्का को जैक्सैन्थिन, एंटीऑक्सीडेंट और ल्यूटिन यौगिकों का बेहतर स्त्रोत माना जाता है। इसलिए आंखों की रोशनी को लंबे समय तक अच्छी रखने के लिए मक्का एक लाभकारी उपाय है।

हड्डियों के लिए-

मक्का में अच्छी मात्रा में कैल्शियम मौजूद होता है। जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। इसके अलावा भुट्टे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण भी बोन लॉस (हड्डियों का कमजोर होना) के खतरों को कम करता है। इसलिए मक्के का सेवन हड्डियों के लिए लाभप्रद साबित होता है।

अल्जाइमर के लिए-

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मोलिकुलर साइंसेज के शोध अनुसार, अल्जाइमर की बीमारी को कम करने में विटामिन-ई महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूंकि मक्का में विटामिन-ई पाया जाता है। जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी होता है। इसलिए मक्के का सेवन, अल्जाइमर (भूलने) की बीमारी में मददगार साबित होता है।

आयरन की कमी और एनीमिया के लिए-

भुट्टा शरीर में आयरन (लोहा) की कमी को पूरा करने में मदद करता है। एनसीबीआई के अनुसार मक्कई में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इसके सेवन से शरीर में होने वाली आयरन की कमी को दूर कर किया जा सकता है। वहीं, शरीर में आयरन की कमी का होना एनीमिया (लाल रक्त कोशिकाओं की कमी) का मुख्य कारण माना जाता है। इसलिए मक्के का सेवन एनीमिया के खतरे को दूर करने में भी मदद करता है।

बालों और त्वचा के लिए-

विशेषज्ञों के मुताबिक भुट्टे में विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स मौजूद होता है। जो त्वचा और बाल दोनों के लिए भी लाभप्रद साबित होता है। इसके अतिरिक्त मक्का में विटामिन-ए, सी, ई, डी, आयरन और जिंक जैसे पोषक भी पाए जाते हैं। जिसमें विटामिन-ए, सी, ई, डी, को त्वचा के लिए और विटामिन सी, डी, आयरन एवं जिंक को बालों के लिए जरूरी माना जाता है।

गर्भावस्था में फायदेमंद-

गर्भावस्था में भुट्टे का सेवन करना लाभकारी होता है। क्योंकि यह कैल्शियम, आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत होता है। जिन्हें गर्भावस्था के समय जरूरी पोषक तत्व माना जाता है। दरअसल यह सभी पोषक तत्व भ्रूण के विकास, उसकी रीढ़ व मस्तिष्क के विकास में मदद करते हैं। वहीं शिशु में जन्म के दौरान होने वाली विकृतियों की संभावना को भी कम करते हैं। इसलिए गर्भावस्था में भुट्टे का सेवन करना सेहत के लिए अच्छा होता है।

मक्का के नुकसान-

  • चूंकि मक्का में फाइबर उच्च मात्रा में मौजूद होता है। इसलिए इसका अधिक सेवन पेट में दर्द, पेट का फूलना और कब्ज जैसी परेशानियां पैदा कर सकता है।
  • कभी-कभी कॉर्न का अधिक सेवन शरीर में पेलाग्रा (विटामिन बी-3 की कमी) भी उत्पन्न कर देता है। जो दस्त, त्वचा रोग और भ्रम की स्थिति पैदा करता है।
  • कभी-कभी मक्का में पाए जाने वाला ग्लूटेन, कुछ लोगों के लिए स्किन एलर्जी का कारण भी बन सकता है।

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