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बांस के पोषक तत्व, फायदे और उपयोग

By Vedobi India June 07, 2021

बांस के पोषक तत्व, फायदे और उपयोग

बांस एक ऐसा पेड़ है जो भारत में हर जगह पाया जाता है। यह लगभग 25 से 30 मीटर तक ऊंचा और इसके पत्ते लंबे होते हैं। जिसे भारत में पूज्‍यनीय भी माना जाता है। सामान्य-सा दिखने वाले इस पेड़ के कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं। अपने औषधीय गुणों के चलते यह तमाम शारीरिक परेशानियों को दूर करने में भी मददगार साबित होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल सालों से आयुर्वेद में दवा के रूप में किया जाता रहा है।

बांस के पेड़ का वैज्ञानिक नाम बैम्बू सोडिया (Bambusoideae) और अंग्रेजी का नाम बैम्बू ट्री है। आमतौर पर बांस का इस्तेमाल पेचिश, दस्त और बवासीर जैसे रोगों के इलाज के लिए होता है। यह महिला के पीरियड्स की परेशानियों और जोड़ों के दर्द को दूर करने में प्रभावी रूप से मदद करता है। इसके अलावा दांतों और मसूड़ों के उपचार के लिए भी बांस एक अच्छा विकल्प है।

बांस पेड़ के बारे में-

बांस एक प्रकार की बड़ी और जंगली घास है। जिसे वैज्ञानिक रूप से बम्‍बूसि (Bambuseae) के नाम से जाना जाता है। यह पौधा पोएसी परिवार (Poaceae family) से संबंध रखता है। बांस के पौधे में लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता होती है। मानव जीवन में बांस का उपयोग मानवीय गतिविधियों में विशेष महत्व देता है। हालांकि जलवायु और प्रकृति के अनुसार बांस की कई किस्में होती हैं। ज्यादातर लोग खाने के लिए बांस की केवल उगने वाली नई कलियों का ही उपयोग करते हैं। आइए बात करते है बांस की कलियों में पाए जाने वाले पोषक तत्व कौन से हैं, जिससे हमें कई तरह से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिलते हैं।

बांस पेड़ के पोषक तत्व-

बांस के पेड़ में तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं। फूड साइंस एंड फूड सेफ्टी में कॉम्प्रिहेंसिव रिव्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार बांस के अंकुरों में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व और खनिज पदार्थ पाए जाते हैं। इसके अलावा बांस के अंकुर में पाए जाने वाले विटामिन्स की उच्च मात्रा होती हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन बी, विटामिन बी 6, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, फोलेट और पैण्टोथेनिक एसिड आदि शामिल हैं। साथ ही इसमें शर्करा एवं वसा की बहुत ही कम मात्रा होती है। इस प्रकार से बांस शरीर के लिए एक हेल्दी आहार हो सकता है।

बांस पेड़ के फायदे-

हृदय के लिए फायदेमंद-

बांस के नए पौधे या कोमल कलियां का सेवन हृदय स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होते हैं। बांस के अंकुर में फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। जो हृदय की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार बांस के अंकुर में पाए जाने वाले फाइटोस्‍टेरोल्‍स और फाइटोन्‍यूट्रिएंटस (phytosterols and phytonutrients) शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल हृदय संबंधी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है। इसके अलावा बांस की कलियों में पोटेशियम की उच्च मात्रा होती है। जो रक्‍त परिसंचरण और हृदय गति को स्वस्थ बनाए रखने में अहम योगदान देता है। इसलिए आहार में बांस के नए अंकुरों को शामिल कर ह्रदय को स्वस्थ बनाया जा सकता है।

वजन को कम करने के लिए-

बांस की कलियों में कैलोरी और फैट बहुत ही कम मात्रा में होता है। इसके साथ ही यह फाइबर से भरपूर होता है। जो बॉडी के अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद करता है। दरअसल बांस में मौजूद फाइबर, वसा के जमाव को रोककर चयापचय में सुधार करता है। इसलिए वजन कम करने के लिए हमें अपने दैनिक जीवन में बांस की कलियों को शामिल करना चाहिए।

कैंसर के लिए फायदेमंद

बांस के पेड़ में फाइटोन्‍यूट्रिएंटस के अलावा एंटीऑक्‍सीडेंट की उच्‍च मात्रा होती है। यह एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाते हैं। जो कैंसर होने का प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त बांस की कलियों में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर को ऑक्‍सीडेटिव तनाव से भी बचाने में मदद करते हैं। यह ऑक्‍सीडेटिव तनाव (oxidative stress), डीएनए की क्षति और कैंसर का कारण बन सकता है। नये और कोमल बांस में क्लोरोफिल की भी कुछ मात्रा होती है जो स्‍वस्‍थ कोशिकाओं के विकास में सहायक होता है। इसलिए नियमित रूप से बांस की कलियों का सेवन करना कैंसर की संभावना को कम कर सकता है।

दांत और मसूड़ों के लिए-

बांस में एंटीऑक्सीडेंट (सूजन घटाने वाला) और एंटी-माइक्रोबियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) प्रभाव मौजूद होते हैं। जो दांतों की सड़न और मसूड़ों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। बांस की टहनियों की दातून के रूप में इस्तेमाल करना दांत और मसूड़ों के लिए अच्छा होता है। ऐसा करने से दांतों से संबंधित कई दिक्कतों को दूर किया जा सकता है।

चयापचय को बढ़ाने में-

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार बांस की कलियों में विभिन्न खनिज पदार्थों के साथ ही मैंगनीज की उच्च मात्रा पाई जाती है। मैंगनीज चयापचय एंजाइम के निर्माण में सहायक होता है। जिससे स्वस्थ चयापचय को बनाए रखने में मदद मिलती है। इसलिए चयापचय प्रणाली बेहतर बनाए रखने के लिए बांस के अंकुरों को अपने नियमित आहार में शामिल किया जा सकता है। 

गठिया/जोड़ों में दर्द के लिए-

जोड़ों के दर्द और गठिया रोग से पीड़ित लोगों के लिए बांस की कलियों का सेवन करना फायदेमंद साबित होता है। क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। जो गठिया और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में राहत पहुंचाने का काम करते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट सूजन बढ़ाने वाले अन्‍य कारणों और बैक्‍टीरिया, वायरस आदि को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।

डायबिटीज के लिए-

बांस के अंकुर का इस्तेमाल डायबिटीज के लिए अच्छा होता है। यह शरीर में ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा बांस में फाइबर होता है। जिसमें एंटी-डायबिटिक और एंटी-ग्लाइसेमिक प्रभाव होता है। इसी वजह से बांस के अंकुर का सेवन मधुमेह की समस्या में आराम देने का काम करता है। 

खून की कमी यानी एनीमिया के लिए-

सही खान-पान न होने और शरीर को जरूरी पौष्टिक तत्व न मिलने से खून की कमी की समस्या हो सकती है। ऐसे में बांस के अंकुर का सेवन लाभकारी होता है। क्योंकि बांस कई तरह के पौष्टिक तत्वों से भरा होता है। इसके अलावा बांस के अंकुर में आयरन की उच्च मात्रा होती है। आयरन एक खनिज है जो लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए बैम्बू शूट्स का नियमित सेवन लाल रक्‍त कोशिकाओं को बढ़ाने में सहायक होता है। जिससे शरीर के सभी अंगों में ऑक्सीजन प्रवाह बना रहता है।

बवासीर के लिए

बवासीर की समस्या को दूर करने में बांस का सेवन फायदेमंद होता है। दरअसल, बैम्बू शूट्स में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो संयुक्त रूप से दस्त, डिसेंट्री (दस्त के साथ खून आना) और बवासीर जैसी परेशानियों को ठीक करने का काम करती है। इसी वजह से बांस को बवासीर का घरेलू इलाज माना जाता है।

गर्भावस्था के लिए

पारंपरिक चीनी चिकित्सा में बांस की नए कलियों का व्यापक उपयोग किया जाता है। क्योंकि इसमें गर्भाशय को स्वस्थ रखने वाले गुण पाए जाते हैं। बांस में युटेरोटोनिक (uterotonic) नामक एक घटक होता है। जो गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाने में मदद करता है। चीनी महिलाएं गर्भावस्था के अंतिम महीनों में विशेष रूप से बांस के अंकुर का सेवन करती हैं। क्योंकि यह प्रसव के समय को कम करने में मदद करती है।

ठंडक प्रदान करने में-

शरीर को अंदर से शीतल या ठंडा करने में भी बांस मदद कर सकता है। दरअसल, बांस में कूलिंग इफेक्ट होता है। जो शरीर को शीतलता प्रदान करता है। इस कूलिंग इफेक्ट को स्किन के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। 

त्वचा के लिए-

बांस पेड़ में एंटी-माइक्रोबियल और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव होते हैं। जो त्वचा संबंधी कई विकारों को दूर करने में मददगार साबित होते हैं।

बांस पेड़ का उपयोग-

  • बैम्बू शूट्स का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता है। इसके लिए नए बांस के अंकुरों को काटकर उसे उबालें और नरम होने के बाद सब्जी बना लें।
  • आयुर्वेद में बांस की कोंपलों का चूर्ण बनाकर सेवन किया जाता है।
  • बांस का सेवन सूप बनाकर किया जा सकता है।
  • बांस की कोंपले और पत्तों का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।
  • त्वचा संबंधी विकारों के लिए इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगा सकते हैं।
  • बांस की कोपलों का अचार और मुरब्बा भी बनाया जाता है।

बांस के नुकसान-

 बांस के वैसे तो कोई नुकसान नहीं देखे गए हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में या अधिक मात्रा में इसका उपयोग नुकसानदायक साबित हो सकता है।

  • थायराइड की समस्या वाले लोगों को बैम्बू शूट्स सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि यह थायराइड फंक्शन को प्रभावित कर सकता है।
  • बैम्बू शूट्स का अधिक सेवन से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • गर्भावस्था और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बांस का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • इसके अधिक सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है अर्थात हाइपरयूरिसीमिया हो सकता है।

 


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