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क्या हैं यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार?

By Anand Dubey March 11, 2021

क्या हैं यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार?

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (Urinary tract infection) या यू.टी.आई एक प्रकार का जल्दी होने वाला संक्रमण है, जो ज्यादातर मूत्राशय में ई-कोलाई बैक्टीरिया (E. Coli Bacteria) के कारण होता है। यू.टी.आई इंफेक्शन होने पर यूरिन के समय दर्द और जलन की समस्या होती है। हालांकि यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही देखी जाती है लेकिन महिलाओं में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है।

क्या होता है यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या मूत्र मार्ग संक्रमण?

मूत्राशय प्रणाली के किसी भी भाग जैसे गुर्दे, मूत्राशय (bladder), मूत्रमार्ग (urethra) और मूत्रवाहिनी (ureters) में होने वाले संक्रमण को यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या मूत्र मार्ग संक्रमण कहते हैं। यह संक्रमण सूक्ष्मजीवों के कारण होने वाला संक्रमण होता है, जो अधिकतर बैक्टीरिया के कारण होता है। पर कभी-कभी यह वायरस और फंगस द्वारा भी फैलता है। निचले मूत्र मार्ग इंफेक्शन (lower tract UTI) में मूत्रमार्ग और मूत्राशय पर, जबकि ऊपरी मूत्र मार्ग (Upper tract UTI) इंफेक्शन में मूत्रवाहिनी और गुर्दों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अत: निचले हिस्से का मूत्र मार्ग इंफेक्शन अधिक गंभीर होता है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के प्रकार

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन को स्थिति के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है।

मूत्राशय में होने वाला संक्रमण (Cystitis or Bladder infection)-

यह बैक्टीरिया के कारण मूत्राशय के भीतर होने वाला संक्रमण है। कमजोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों में यीस्ट भी मूत्राशय के संक्रमण का कारण हो सकता है।

मूत्रमार्ग में होने वाला संक्रमण (Urethritis or Urethra infection)-

इसमें मूत्रमार्ग में सूजन होने के कारण मूत्र त्यागने में दर्द की अनुभूति होती है।

गुर्दा संक्रमण (Pyelonephritis or Kidney infection)-

यह किडनी में होने वाला संक्रमण है। जिससे किडनी में इन्फेक्शन हो जाता है। यह एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें रोगी को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसमें बुखार, पेशाब में खून और योनि में दर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं। गर्भवती महिलाओं को यह संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के कारण

मूत्रमार्ग संक्रमण की समस्या मुख्य रूप से बैक्टीरिया या वायरस द्वारा होने के अलावा निम्नलिखित कारणों से भी हो सकती है-

खराब भोजन करना-

मूत्रमार्ग संक्रमण की समस्या खराब भोजन करने से होती है। अत: सभी लोगों को बासी (पुराना) और नुकसानदायक भोजन से परहेज करना चाहिए।

पेट का खराब रहना-

खराब पेट की समस्या से पीड़ित लोगों को भी यूरिन इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए किसी भी ऐसी चीज़ का सेवन नहीं करना चाहिए, जो पेट के लिए नुकसानदायक हो।

रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना-

मूत्रमार्ग संक्रमण होने की संभावना तब और अधिक बढ़ जाती है, जब किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोध क्षमता (immunity) कमजोर होती है। अत: सभी लोगों को अपनी इम्यूनिटी का पूरा ख्याल रखना चाहिए।

महिला का गर्भवती होना-

महिलाओं में गर्भवती होने के दौरान भी यूरिन इंफेक्शन हो सकता है। इसी कारण महिलाओं को गर्भावस्था में साफ-सफाई विशेष ध्यान रखना चाहिए।

गुर्दे में पथरी का होना-

किडनी स्टोन या गुर्दे की पथरी से पीड़ित लोगों को यूरिन इंफेक्शन होने का खतरा औरों से ज्यादा होता है। ऐसे लोगों को यू.टी.आई के लक्षण प्राप्त होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने के लक्षण

निम्नलिखित लक्षण मिलने पर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो सकता है।
• यूरिन करते समय मूत्राशय में दर्द या जलन का महसूस होना।
• मूत्राशय में संक्रमण होने पर मूत्रमार्ग और मूत्राशय की परत में सूजन आ जाना।
• बार-बार पेशाब आने जैसा महसूस होना लेकिन बहुत कम मात्रा में पेशाब आना।
• पेशाब के रिसाव होने का डर लगना।
• यूरिन से बदबू आना।
• यूरिन में खून आना।
• पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।
• छोटे बच्चों में मूत्र मार्ग संक्रमण होने पर बुखार, पीलिया, दस्त, उल्टी और चिड़चिड़ापन आदि लक्षण नजर आते हैं।
• बुजुर्गो में मूत्र मार्ग संक्रमण के दौरान मूड बदलना, बुखार, भूख न लगना और सुस्ती आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के घरेलू उपाय

गर्म सिकाई से मिलती है यू.टी.आई में राहत-

गर्म सिकाई सूजन को कम करने के साथ बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकती है। रोजाना गर्म पानी की सिकाई करने से मूत्राशय का प्रेशर कम होता है और संक्रमण से होने वाले दर्द में भी राहत मिलती है।

अनानास है यू.टी.आई से राहत दिलाने में सहायक-

अनानास में ऐसे एन्जाइम होते हैं, जिसमें सूजनरोधी (Anti-inflammatory) गुण होते हैं। इनकी मदद से यू.टी.आई के लक्षणों को दूर किया जा सकता है। यू.टी.आई से पीड़ित लोग कुछ दिन नियमित रूप से अनानास का सेवन करें। इसके अलावा अनानास का ताजा जूस पीना भी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन में फायदेमंद होता है।

टी ट्री ऑयल है यू.टी.आई में कारगर-

टी ट्री ऑयल (Tea Tree Essential Oil) में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में मिलाकर इससे गुप्तांग को साफ करना चाहिए।

आंवला है यू.टी.आई में आरामदायक-

आंवला विटामिन-सी से समृद्ध होता है और यह बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है। एक चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच आंवला पाउडर को मिला लें। अब इस मिश्रण को एक कप पानी में उबालने के लिए रख दें और आधा होने तक उबालें। इस मिश्रण को दिन में चार से पांच बार पीने से यू.टी.आई में लाभ मिलता है।

ज्यादा पानी पीना है यू.टी.आई में फायदेमंद-

यूरिन इंफेक्शन से पीड़ित व्यक्ति को रोजाना ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। इससे संक्रमण को रोकने में सहायता मिलती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का आधुनिक इलाज-

निम्नलिखित आधुनिक इलाज के तरीकों को अपनाकर यूरिन इंफेक्शन की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

एंटीबायोटिक दवाई लेना–

यूरिन इंफेक्शन की समस्या मुख्य रूप से बैक्टीरिया या वायरस की वजह से होती है। इसलिए एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन करके इसका इलाज किया जा सकता है। एंटीबायोटिक दवाई व्यक्ति को किसी भी तरह के वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आने से रोकती है।

यूरिन टेस्ट कराना-

कई बार, यूरिन इंफेक्शन का इलाज यूरिन टेस्ट के द्वारा भी किया जाता है। यह टेस्ट मूत्र मार्ग संक्रमण के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यूरेटेरोस्कोपी कराना (Ureteroscopy)-

कभी-कभी यूरिन इंफेक्शन से पीड़ित व्यक्ति को यूरेटेरोस्कोपी कराने की सलाह भी दी जाती है। यूरेटेरस्कोपी की मदद से यूरोलॉजिस्ट मूत्रनली या ट्यूमर, गुर्दे का स्टोनगुर्दे या मूत्रनली की लाइनिंग पर असामन्य ऊतकों (Tissue) को देख सकते हैं और इन समस्याओं का इलाज कर सकते हैं।

आरोग्यमशक्ति पिस हैप्पी स्प्रे का प्रयोग करना-

“आरोग्यमशक्ति पिसहैप्पी स्प्रे लोगों के लिए तैयार किया गया एक प्रभावी और बेहद अच्छा टॉयलेट स्प्रे है। यह स्प्रे टॉयलेट पर जमा कीटाणुओं का 99.9% तक खात्मा करता है और यूरिन इंफेक्शन जैसी बीमारियों से बचाव करता है। प्रयोग के लिए पिसहैप्पी को टॉयलेट सीट पर स्प्रे करना होता है। जिसके 10 से 15 सेकेंड के बाद स्प्रे के सूखते ही टॉयलेट सीट सभी प्रकार के रोगाणुओं से मुक्त हो जाता है।
पिसहैप्पी स्प्रे लोगों को कॉलेज, कार्यालाय, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डा, मॉल, होटल या अन्य सार्वजनिक स्थानों एवं पब्लिक टॉयलेट को इस्तेमाल करते वक्त संक्रमण के खतरे से बचाता है। इसकी एक अन्य विशेषता है कि इसके सलूशन में कोई भी हानिकारक केमिकल मौजूद नहीं है। यह पूरी तरह से नेचुरल इंग्रेडिएंट्स से तैयार किया गया है।

यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से बचाव

जीवनशैली और आहार में निम्नलिखित बदलाव लाकर यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से काफी हद तक बचा जा सकता है।
• अधिक से अधिक पानी पीने और बिना रोके मूत्र त्यागने की आदत डालें।
• शराब और कैफीन का सेवन न करें, ये मूत्राशय में संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
• महिलाओं को माहवारी के दौरान, टैम्पोन की जगह सेनेटरी पैड का उपयोग करना चाहिए ।
• पुरुषों को जन्म नियंत्रण रखने के लिए शुक्राणु नाशकों का उपयोग करने से बचना चाहिए ।
• गुप्तांग पर किसी भी प्रकार के सुगन्धित उत्पादों का उपयोग न करें।
• हमेशा गुप्तांग को साफ रखें।
• सम्भोग के पश्चात तुरन्त बाद मूत्र त्याग करें।

कब जाएं डॉक्टर के पास ?

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के निम्नलिखित संकेत मिलने पर व्यक्ति को तुरंत इसकी जांच के लिए डॉक्टर से संपर्कं करना चाहिए।
• मूत्र त्यागते समय मूत्राशय में दर्द या जलन महसूस होने पर।
• गुप्तांग में सूजन होने पर।
• मूत्र में से बदबू आने पर।
• मूत्र में से खून आने पर।
• पेट में दर्द होने पर।


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