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स्मृतिलोप (भूलने की बीमारी) के लक्षण, कारण और बचाव

स्मृतिलोप (भूलने की बीमारी) के लक्षण, कारण और बचाव

24 May, 2022

मस्तिष्क की क्षति या किसी मस्तिष्क रोग के कारण याद करने की क्षमता में आने वाली कमी को स्मृतिलोप (Amnesia) या भूलने की बीमारी कहते हैं। ऐसा मुख्य रूप से मस्तिष्क की क्षति, मस्तिष्क संबंधित रोग, दर्द कम करने वाली औषधि आदि का अधिक इस्तेमाल करने से, नींद की दवाओं के ज्यादा उपयोग या मनोवैज्ञानिक विकार आदि की वजह से होता है। धीरे-धीरे याददाश्त जाना और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी भूलने की समस्या पैदा करते हैं। अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 40 लाख लोग इससे पीड़ित हैं। इन 40 लाख लोगों में से लगभग 16 लाख लोग अल्जाइमर के शिकार हैं। अल्जाइमर जैसे तंत्रिका सम्बंधी विकार भी स्मृतिलोप को जन्म देते हैं। भूलने की बीमारी मस्तिष्क के उन क्षेत्रों को नुकसान पहुंचने से होती है जो याददाश्त के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। भूलने की बीमारी स्थायी हो सकती है। इसका कोई विशेष उपचार नहीं है, लेकिन याददाश्त बढ़ाने और मनोवैज्ञानिक तकनीकों से भूलने की बीमारी से पीड़ित लोगों की सहायता की जा सकती है।

 
 

भूलने की बीमारी के प्रकार-

स्मृतिलोप मुख्यतः दो प्रकार का होता है। पहली प्रतिगामी भूलने की बीमारी (रेट्रोग्रेड एमनेसिया) और दूसरी अग्रगामी भूलने की बीमारी (एंटेरोग्रेड एमनेसिया)

 

रेट्रोग्रेड (प्रतिगामी भूलने की बीमारी)-

भूलने की बीमारी के रेट्रोग्रेड प्रकार में रोगी मौजूदा पहले की यादें खो देता है। इस प्रकार की भूलने की बीमारी पहले हाल ही (recently) की यादों को प्रभावित करती है। पुरानी यादें, जैसे बचपन की यादें, आमतौर पर धीमी गति से प्रभावित होती हैं। डिमेंशिया जैसे रोग भूलने की बीमारी के रेट्रोग्रेड प्रकार के कारण ही बनते हैं।

 

एन्टेरोग्रेड (अग्रगामी भूलने की बीमारी)-

भूलने के बीमारी का एन्टेरोग्रेड प्रकार में रोगी नई यादें नहीं बना पाता। यह प्रभाव अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार से हो सकता है। उदाहरण के लिए बहुत अधिक शराब पीने से ब्लैकआउट के दौरान ऐसा अनुभव होता है। इस प्रकार की भूलने की बीमारी होने से लोग लंबे समय तक चीजों को याद नहीं रख पाते हैं। यह दोनों प्रकार परस्पर अलग नहीं हैं। मरीज में यह दोनों एक ही समय में हो सकती हैं।

 
 

भूलने की बीमारी के कारण-

चिकित्सा-

कई अवसादरोधी दवाइयों जैसे एंटीडिप्रेससेंट, एंटीहिसटामाइंस, स्ट्रेस निवारक दवाइयां, मांसपेशियों को ढीला करने वाली दवाइयां, ट्रांक्विलाइज़ेर्स, नींद की गोलियां और सर्जरी के बाद दी जाने वाली दर्द की दवाएं याददाश्त कमजोर कर सकती हैं।

 

धूम्रपान और शराब पीने से-

अत्यधिक शराब पीने से भूलने की बीमारी हो सकती है। धूम्रपान मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर स्मृति को हानि पहुंचाता है।

 

नींद में कमी-

नींद की मात्रा और गुणवत्ता दोनों ही स्मरणशक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। बहुत कम नींद लेने या रात में अक्सर जागने से भूलने की समस्या पैदा हो सकती है।

 

अवसाद और तनाव-

अवसाद होने से ध्यान बनाए रखने में परेशानी होती हैं, जो स्मृति को प्रभावित करती है। तनाव और चिंता एकाग्रता में बाधक बनकर स्मृति की क्षमता पर बुरा असर डालते हैं।

 

पोषक तत्वों की कमी-

अच्छे और उच्च क्वालिटी वाले प्रोटीन और वसा मस्तिष्क के कार्यों को ठीक रखने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। विटामिन बी 1 और बी 12 की कमी विशेष रूप से स्मृति को प्रभावित करती हैं।

 

सिर में चोट-

कई बार सिर की गंभीर चोट मस्तिष्क को घायल कर देती है और छोटी व लंबी अवधि तक स्मृति को प्रभावित करती है।

 

स्ट्रोक-

जब मस्तिष्क में रक्त वाहिका में रुकावट या वाहिका में ब्लॉकेज होने के कारण रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है तब स्ट्रोक होता है। स्ट्रोक अक्सर अल्पकालिक स्मृति हानि करता है।

 
 

भूलने की बीमारी के लक्षण-

  • एन्टेरोग्रेड (Anterograde) भूलने की बीमारी में नई जानकारी सीखने की क्षमता खराब हो जाती है।
  • रेट्रोग्रेड (Retrograde) भूलने की बीमारी में पिछली घटनाओं और पहले की परिचित जानकारी को याद रखने की क्षमता में कमी आ जाती है।
  • अकल्पनीयता में झूठी यादें बन सकती हैं या वास्तविक यादों में गड़बड़ी हो सकती है।
  • स्मृतिलोप के कारण भ्रम या भटकाव जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
  • एडियों में रक्त-संचार कम हो तो इससे स्मृति प्रभावित हो सकती है। इसलिए नियमित रूप से एड़ियों की जांच करें।
  • शारीरिक संकेत जैसे पढ़ने में समस्या, सूंघने में परेशानी, दूरी के बारे में भ्रम आदि भी भूलने की बीमारी के लक्षण होते हैं।
 

भूलने की बीमारी से बचाव एवं उपचार-

  • भूलने की बीमारी से बचने के लिए शारीरिक क्रियाएं जैसे जॉगिंग, डांसिंग, एरोबिक्स, बास्केटबॉल, स्विमिंग और साइकिलिंग करना बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे शरीर में रक्त संचार सुचारू होता है और दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। इससे ऊर्जा बनी रहती है और स्मृतिलोप का खतरा कम होता है।
  • डाइट में हरी सब्जियां, फल, फिश, नट्स, ऑलिव ऑयल और विनेगर आदि शामिल करें। ग्रीन टी, कॉफी, डार्क चॉकलेट दिमाग की खुराक है। इनके सेवन से मस्तिष्क की कार्य क्षमता में सुधार होता है।
  • प्रतिदिन 7-8 घंटे की नींद जरूर लें। कम सोने से हिप्पोकैंपस (मस्तिष्क का एक हिस्सा) में नए न्यूरोंस का विकास प्रभावित होता है। इससे स्मृति, एकाग्रता एवं निर्णय लेने की क्षमता में कमी आती है। साथ ही शरीर में मौजूद प्रोटीन एमिलॉयड बीटा को असंतुलित करता है। जिससे अल्जाइमर्स हो सकता है। इसलिए भूलने की बीमारी से बचने के लिए पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है।
  • ब्रेन गेम-सुडोकू या पहेली, क्विज, शतरंज, लॉजिकल या इलेक्ट्रॉनिक खेल भी दिमाग को तेज करने के हथियार हैं। रोज 15-20 मिनट गेम्स खेलने से दिमाग की एक्सरसाइज होती है।
  • प्राणायाम व ध्यान करें। इससे तनाव दूर होता है, एकाग्रता आती है, ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन, रक्त व पोषक तत्व मिलते हैं।
  • भूलने की बीमारी का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस कारणवश यह बीमारी है जैसे - रासायनिक रूप से प्रेरित भूलने की बीमारी (उदाहरण के लिए शराब से) को विषहरण के माध्यम से ठीक किया जा सकती है। जैसे ही ड्रग शरीर से बाहर जाता है, याददाश्त की समस्याएं कम हो जाती हैं।
  • सिर की चोट से भूलने की बीमारी आमतौर पर समय के साथ उपचार के बिना ठीक हो जाती है। गंभीर सिर की चोट से हुई भूलने की बीमारी ठीक नहीं होती। हालांकि, सुधार आमतौर पर छह से नौ महीने के भीतर होते हैं।
  • डेमेंशिया से हुई भूलने की बीमारी का अक्सर इलाज नहीं होता है। हालांकि डॉक्टर सिखने की क्षमता और याददाश्त बढ़ाने के लिए कुछ दवाइयां दे देते हैं।

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