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ग्रीन टी के प्रकार, फायदे और बनाने की विधि

By Anand Dubey June 24, 2021

ग्रीन टी के प्रकार, फायदे और बनाने की विधि

ग्रीन टी को कैमेलिया साइनेन्सिस पौधे से बनाया जाता है। इस पौधे की पत्तियों का उपयोग न सिर्फ ग्रीन टी बल्कि अन्य प्रकार की चाय जैसे – ब्लैक टी बनाने में भी किया जाता है। लेकिन मानव स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा प्रभावकारी ग्रीन टी होती है। ग्रीन टी में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और फायदेमंद पॉलीफेनोल्स मौजूद होते हैं। ग्रीन टी का उत्पादन करने के लिए ताजे पत्तों को तोड़ने के बाद तुरंत भाप दी जाती है, ताकि ग्रीन टी का निर्माण किया जा सके। यह प्रक्रिया स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले प्राकृतिक पॉलीफेनोल्स को संरक्षित रखती हैं। वहीं, इसमें ब्लैक और ओलोंग टी की तुलना में अधिक कैटेचिन पाया जाता है, जो एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट होता है।

ग्रीन टी के सेवन से कई तरह के खतरनाक रोग जैसे कि कैंसर आदि से सुरक्षा मिलती है। यह पाचन तंत्र, मानसिक स्वास्थ्य और दिल की सेहत में सुधार लाती है। इसके सेवन से शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखा जाता है। वजन कम करने में ग्रीन टी बहुत ही ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है। लिवर से संबंधित विकारों, टाइप 2 डायबिटीज और अल्जाइमर आदि रोगों पर भी ग्रीन टी का सकारात्मक असर पड़ता है। पारंपरिक चीनी और भारतीय चिकित्सा में ग्रीन टी या हरी चाय का इस्तेमाल रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता था।     

ग्रीन टी के प्रकार-

ग्रीन टी के उत्पादन, खेती और फसल की समय के अनुसार विभिन्न प्रकार के होते हैं। जिनमे से प्रमुख प्रकार निम्न है;

सेन्चा (Sencha) : 

यह ग्रीन टी का सबसे ज्यादा सेवन किया जाने वाला और एक जाना माना प्रकार है। इसका निर्माण आम प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। जिसमें पत्तियों को धूप में सुखाकर या भाप के द्वारा चाय को तैयार किया जाता है।

फुकमुशी सेन्चा (Fukamushi Sencha) : 

फुकमुशी का अर्थ होता है "लंबे समय तक उबला हुआ", यह ग्रीन टी का ही एक प्रकार है। जिसे सेन्चा के मुकाबले लंबे समय तक उबला जाता है। चूंकि इस प्रक्रिया में पत्तियों को भाप की गर्मी से पूरी तरह से उजागर किया जाता है। इसलिए वे पाउडर बन जाते हैं और चाय का स्वाद बढ़ जाता है और रंग गहरा हरा हो जाता है।

ग्योकुरो (Gyokuro) : 

यह पूर्ण सूर्य की बजाय छाया में उगाई जाती है और सेन्चा से अलग है। इस चाय की झाड़ियों को चुनने के लगभग 20 दिन पहले कपड़े या रीड स्क्रीन से ढक दिया जाता है।

क्यूबुसेचा (Kabusecha) : 

इस ग्रीन टी को चुनने से लगभग एक हफ्ते पहले, क्यूबुसेचा झाड़ियों को अधिकांश धूप की रोशनी से बचाने के लिए कपड़े से ढका जाता है।

माचा (Matcha) : 

यह भी ग्रीन टी का एक प्रकार है। इसको चाय की पुरानी पत्तियों से बनाया जाता है।

ग्रीन टी के फायदे-

दिमाग के लिए फायदेमंद है ग्रीन टी -

हमारे दिमाग को ठीक ढंग से काम करने के लिए स्वस्थ रक्त वाहिकाओं की जरूरत होती है। एक स्विस अध्ययन के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से ग्रीन टी पीते हैं। उनके दिमाग के कार्य करने वाले स्मृति क्षेत्र में सुधार आता है। हरी चाय में मौजूद बायोएक्टिव यौगिकों के कारण न्यूरॉन्स पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिससे अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों की वजह से होने वाली क्षति कम हो सकती है। इसलिए दिमाग की स्मृति शक्ति को बढ़ाने और मानसिक रोगों से बचने के लिए ग्रीन टी पीना फायदेमंद है।

बालों के नुकसान को रोकने में लाभदायक है ग्रीन टी -

बालों की समस्याओं को कम करने के लिए ग्रीन टी पीना फायदेमंद है। क्योंकि इसमें कुछ शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो बालों की समस्याओं को कम कर, उन्हें मजबूत करने में मदद करते हैं। ग्रीन टी में विटामिन बी (पांथेनोल) होता है। जो दो मुंहे बालों (split ends) की समस्या को कम करता है और बालों को मुलायम भी बनाता है।

वजन कम करती है ग्रीन टी -

दैनिक रूप से एक कप ग्रीन टी का उपयोग शरीर में वसा (विशेष रूप से पेट में) को कम करता है। यह शरीर में वसा की मात्रा, शरीर का वजन और कमर की चर्बी को कम करता है। इसके अलावा, ग्रीन टी में मौजूद कटेचिंस शरीर में गर्मी उत्पन्न करता है। जिसके कारण अतिरिक्त कैलोरी जलाने में भी मदद मिलती है। ग्रीन टी शरीर के चयापचय को बढ़ाने में मदद करके, वजन घटाने के लिए फायदेमंद होती है। ग्रीन टी में कैफीन होता है और एक प्रकार का फ्लैवोनॉयड होता है। जिसे कैटेचिन कहा जाता है। जोकी एक एंटीऑक्सीडेंट है। केटेचिन अतिरिक्त वसा तोड़ने में मदद करता है। जबकि केटेचिन और कैफीन दोनों शरीर में ऊर्जा को बढ़ा कर, शरीर को चुस्त रखने में मदद करते हैं।

मधुमेह के लिए असरदार उपाय है ग्रीन टी-

ग्रीन टी मधुमेह (diabetes) से पीड़ित लोगों में रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है। ग्रीन टी में मौजूद पॉलिफैनोल्स और पोलिसच्चराइड्स (polysaccharides) जैसे यौगिक मधुमेह के दोनों प्रकार के लिए उपयोगी होते हैं। ग्रीन टी अग्न्याशय में इंसुलिन (Insulin) के उत्पादन को बढ़ाती है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियमित करती है और टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित लोगों में ग्लूकोज को अवशोषित करती है। टाइप 2 मधुमेह में, लगातार हो रही रक्त शर्करा में वृद्धि के कारण अकसर आंखों, दिल और गुर्दे में जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। ग्रीन टी इस वृद्धि को रोकती है। इस प्रकार मधुमेह के रोगियों के लिए ग्रीन टी पीना अत्यंत लाभदायक है।

खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है ग्रीन टी-  

ग्रीन टी प्रभावी रूप से रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करती है। साथ ही खराब कोलेस्ट्रॉल और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के अनुपात में सुधार करती है। यह कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (LDL) कोलेस्ट्रॉल यानी शरीर के लिए बुरे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है। साथ ही यह उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (HDL) यानी शरीर के लिए अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है। इसके अलावा, ग्रीन टी धमनियों को साफ रखती है। जिससे दिल का दौरा या स्ट्रोक होने का खतरा कम होता है।

उच्च रक्तचाप के लिए घरेलू उपचार है ग्रीन टी-

ग्रीन टी के नियमित सेवन से हाई बीपी का खतरा कम होता है। रक्तचाप आमतौर पर एंजियोटेंसिन-कनवर्टिंग एंजाइम (या एसीई) के कारण होता है। एंजियोटेंसिन-कनवर्टिंग एंजाइम (angiotensin-converting enzyme (or ACE) का उत्पादन किड़नी से होता है। रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए ACE अवरोधक के रूप में कई दवाइयां बाजार में उपलब्ध हैं। किन्तु ग्रीन टी एक प्रकृतिक ACE अवरोधक के रूप में काम करती है और रक्तचाप को नियंत्रित रखती है।

कैंसर को रोकने में सहायक है ग्रीन टी-

शोधकर्ताओं का मानना है कि ग्रीन टी में पॉलीफेनॉल का स्तर अधिक होता है। जो कैंसर कोशिकाओं को मारने में मदद करता है और उन्हें बढ़ने से रोकता है। हालांकि, ग्रीन टी कैंसर कोशिकाओं को किस प्रकार प्रभावित करती है यह अभी तक पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के द्वारा प्रयोगशाला में पशुओं पर किये गए अध्यन में पाया गया की चाय में मौजूद पॉलीफेनॉल ट्यूमर बढ़ने से रोक सकता है और पैराबैंगनी किरणों से होने वाली क्षति को भी कम करने में मदद करता है।

ग्रीन टी बनाने की विधि-

  • पहले पानी उबाल लें।
  • एक कप के लिए एक चम्मच पत्ती या एक टी बैग डालें।
  • फिर सीधे उबला हुआ पानी इस कप में डालें।
  • एक बार चाय को हिला लें।
  • डेढ़ से दो मिनट तक चाय के कप को ढक दें।
  • ध्यान रखें, दो मिनट से ज़्यादा रखने पर चाय कड़वी हो सकती है।
  • इसके बाद चाय को छान लें या टी बैग को निकाल दें।

ग्रीन टी के नुकसान -    

  • कैफीन होने के कारण ग्रीन टी की अधिक मात्रा लेने से कुछ लोगों में अनिद्रा, पेट की ख़राबी, उल्टी, दस्त और अक्सर पेशाब आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
  • ग्रीन टी में टैनिन होते हैं। इसलिए खाने से पहले ग्रीन टी पीने से पेट में दर्द, मितली या कब्ज भी हो सकता है।
  • ग्रीन टी में मौजूद कटेचिंस भोजन से लोहे (iron) के अवशोषण (absorption) में कमी पैदा कर सकते हैं।

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