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क्या है पित्ताशय की पथरी? जानें, इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

By Anand Dubey November 11, 2021

क्या है पित्ताशय की पथरी? जानें, इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम को सुरक्षित रखने के लिए पित्ताशय (galbladder) एक महत्वपूर्ण अंग है। पित्ताशय से जुड़ी सबसे प्रमुख समस्या यह है कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत अधिक होती है।जिन्हें गॉलस्टोन भी कहा जाता है। जब पित्ताशय में तरल पदार्थ की मात्रा सूखने लगती है तो उसमें मौजूद चीनी-नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं।जिन्हें पित्ताशय की पथरी कहा जाता है। 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल की बनी होती है। जो धीरे-धीरे कठोर हो जाती है तथा पित्ताशय के अंदर पत्थर का रूप ले लेती है। कोलेस्ट्रॉल स्टोन पीले-हरे रंग के होते हैं।

पित्त (पित्ताशय) की पथरी के प्रकार-

पित्ताशय की थैली में बनने वाली पथरी के निम्न प्रकार होते हैं।

कोलेस्ट्रोल गैलस्टोन (Cholesterol gallstones)-

यह पित्ताशय की पथरी का सबसे सामान्य प्रकार होता है। जिसे कोलेस्ट्रोल पित्ताशय की पथरी या कोलेस्ट्रोल गैलस्टोन कहा जाता है। यह अक्सर पीले रंग की होती है। यह पथरी मुख्य रूप से अघुलनशील (Undissolved) कोलेस्ट्रोल से बनती है।लेकिन कई बार इनमें अन्य पदार्थ भी शामिल होते हैं।

पिगमेंट गैलस्टोन (Pigment gallstones)-

यह पथरी गहरे भूरे या काले रंग की होती है।यह तब बनती है जब पित्तरस में अत्याधिक मात्रा में बिलीरूबीन शामिल होता है। बिलीरूबीन एक ऐसा द्रव होता है, जिसको लिवर द्वारा बनाया जाता है और पित्ताशय द्वारा उसको संग्रहित किया जाता है।

पित्ताशय में पथरी के लक्षण-

पित्ताशय में पथरी वाले ज्यादातर लोगों में किसी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते। वास्तव में, उनको यह तब तक पता नहीं चल पाता जब तक उनको इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते। इसे ‘साइलेंट गैलस्टोन’ (Silent gallstones) भी कहा जाता है। जैसे-जैसे पित्ताशय की पथरी की जटिलताएं बढ़ती जाती हैं, इसके लक्षण भी उभरने लगते हैं। पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना, इसका सबसे सामान्य लक्षण होता है। क्योंकि इसका दर्द आमतौर पर प्रक्ररण (Episodes) के रूप में आता है।इसे अक्सर ‘अटैक’ के रूप में भी संदर्भित किया जाता है। दर्द के अटैक आने के बीच दिन, सप्ताह, महीने और यहां तक की साल का समय भी लग जाता है। इसका दर्द आमतौर पर फैटी भोजन करने के 30 मिनट बाद शुरू होता है। इसका दर्द आम तौर पर गंभीर, सुस्त और स्थिर हो सकता है। जोलगातार 5 घंटों तक रह सकता है। इसके दर्द की लहरें दाहिने कंधे व पीठ तक जा सकती हैं। यह असहनीय दर्द अक्सर रात के समय में ही होता है।

पित्ताशय में पथरी के कुछ अन्य सामान्य लक्षण-

  • मतली और उल्टी।
  • बुखार।
  • अपच।
  • उबकाई।
  • फुलाव (Bloating)।
  • फैटी खाद्य पदार्थों के प्रति शरीर की नकारात्मक प्रतिक्रिया।
  • पीलिया आदि।

पित्ताशय की पथरी के कारण-

पित्ताशय में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन कुछ फैक्टर हैं, जो गॉलस्टोन्स की संभावना को बढ़ा सकते हैं जैसे कि-

  • डायबिटीज (Diabetes)।
  • मोटापा (Obesity)।
  • गर्भधारण (Pregnancy)।
  • मोटापे की सर्जरी के बाद (Post bariatric surgery)।
  • कुछ दवाओं का सेवन।
  • लंबे समय से किसी बीमारी के ग्रस्त होने के कारण।

पित्ताशय की पथरी की जांच एवं इलाज-

अल्ट्रासाउंड टेस्ट-

इस टेस्ट में रोगी के शरीर के आंतरिक भागों की तस्वीरें बनाने के लिए ध्वनी तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पित्ताशय में पथरी इस प्रकार के टेस्टों में अच्छे से दिखाई देती है।

एमआरआई स्कैन-

इस टेस्ट की मदद से भी शरीर के कुछ आंतरिक हिस्सों की तस्वीरें निकाली जाती हैं।इसमें अग्नाशय और पित्त नलिकाएं शामिल हैं।

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड स्कैन-

इस टेस्ट को एंडोस्कोप नामक उपकरण के साथ किया जाता है। यह उपकरण पतला, लचीला, ट्यूब जैसा और टेलीस्कोपिक कैमरा के समान दिखने वाला होता है। इस उपकरण को मुंह के द्वारा पेट में डाला जाता है। इसके द्वारा बहुत छोटी पथरी को भी देखा जा सकता है।

सीटी स्कैन-

यह टेस्ट पित्त नलिकाओं, लिवर और अग्नाशय की पूर्ण तस्वीरें प्रदान करता है।

पित्ताशय की पथरी के घरेलू उपचार:

सेब का जूस-

पित्त की पथरी के घरेलू उपाय के तौर पर सेब के रस का सेवन किया जाता है। अगर नियमित रूप से इस जूस का सेवन किया जाए, तो मल के द्वारा पित्त की पथरी निकल जाती है।क्योंकि सेब के जूस का सेवन करने से पित्ताशय की पथरी नर्म होती है और मल के द्वारा आसानी से निकल जाती है। फिलहाल, अभी तक इस संबंध में कोई सटीक ठोस प्रमाण नहीं है।लेकिन इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है।

नींबू का रस-

नींबू पानी के सेवन से पित्ताशय की पथरी का इलाज होता है। इस संबंध में हुए एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार नींबू एक तरह का साइट्रस फल है।जिसके उपयोग से पित्त की थैली में मौजूद पथरी को बाहर करने की क्षमता को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, विटामिन-सी पथरी की समस्या को पनपने से रोकता है। और नींबू को विटामिन-सी का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसलिए पित्त की पथरी से निजात दिलाने में नींबू का रस मददगार साबित होता है।

डैंडेलियन-

पित्त की पथरी के लिए असरकारी घरेलू उपचार के रूप में डैंडेलायन की जड़ का उपयोग किया जाता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, डैंडेलियन में ताराक्सासिन (taraxacin) और ताराक्सासरिन (taraxacerin) पाए जाते हैं।जो पित्ताशय की समस्या के इलाज में सहायक होते हैं। वहीं, डैंडेलियन की जड़ न सिर्फ पाचन शक्ति में सुधार करती हैं, बल्कि इससे पित की पथरी का उपचार भी किया जाता है।

नाशपाती का जूस-

नाशपाती के जूस पीना पित्ताशय की पथरी में बेहदलाभदायक होता है। क्योंकि इसमेंएंटी-इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं।जो सूजन को दूर करने का कारगर उपाय है। जिससे यह पित्त की पथरी को पनपने से भी रोकती है।

पिपरमिंट-

पिपरमिंट को पित्त की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज माना जाता है। पिपरमिंट में कई औषधीय गुण होते हैं।जो पित्त की पथरी को पतला या नर्म बनाते हैं। इससे पथरी बाहर निकल जाती है।

नारियल तेल-

नारियल तेल में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता और इसमें ज़रूरी फैट होता है।जिस वजह से इसे पचाना आसान होता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल नहीं जमता और पित्ताशय की पथरी की समस्या से बचाव होता है।

ग्रीन टी-

ग्रीन टी के सेवन से पित की पथरी का उपचार होता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन नामक कंपाउंड पित्ताशय के कैंसर या पित्ताशय की पथरी के विकास से जुड़े जोखिम को कम करने का काम करता है। इससे सेवन से पित्त की पथरी से कुछ हद तक राहत मिलती है।

कॉफी-

एक शोध के अनुसार दिन में एक कप कॉफी पीने से पित्ताशय की थैली की समस्याएं कम होती हैं। यह पित्त की पथरी को रोकने में मदद करता है। जो लोग एक दिन में करीब दो कप कॉफी का सेवन करते हैं, उनमें पित्ताशय की पथरी का खतरा 4 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

इसबगोल-

पित्त की पथरी के लिए असरकारी घरेलू उपचार के तौर पर इसबगोल का उपयोग किया जाता है। इस संबंध में किए गए एक रिसर्चरिपोर्ट से पता चलता है कि इसबगोल में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है।जो पित्त की पथरी को कम करने का काम करती है। इससे पीड़ित को कुछ हद तक राहत मिलती है।

पित्ताशय की पथरी से बचाव के उपाय-

  • जिनका वजन अधिक होता है, उन्हें पित्त की पथरी होने की आशंका ज्यादा होती है। ऐसे में वजन को कम करके पित्त की पथरी को होने से रोका जा सकता है।
  • फलों और हरी सब्जी के सेवन से इस समस्या से बचाता है।
  • पित्त की पथरी को उत्पन्न होने से रोकने के लिए नियमित रूप से योग और व्यायाम करना चाहिए।
  • सही समय पर खाना और सोना भी इस समस्या को दूर रखता है।
  • ज्यादा तले-भूने खाद्य पदार्थ या बाहरी खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
  • ज्यादा फैट या कोलेस्ट्रॉल वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • अंडे या मांसाहारी खाने का सेवन कम करें।
  • एसिडिक खाद्य पदार्थ जैसे टमाटर औरसंतरे का उपयोग कम करें।
  • ज्यादा मसाले वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
  • सब्जियां जैसे-फूलगोभी व शलजम से दूर रहें।
  • सोडा या शराब जैसे पेय पदार्थों का सेवन न करें।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

  • पेट में तेज दर्द होने पर।
  • त्वचा में पीलापन और आंखें सफेद होने पर।
  • तेज बुखार और साथ में ठंड लगने पर।

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