Cart
cload
Checkout Secure
Welcome to Vedobi Store Mail: care@vedobi.com Call Us: 1800-121-0053 Track Order

क्या होता है नेल फंगस? जानें, इसके प्रकार, कारण और इलाज

By Anand Dubey November 11, 2021

क्या होता है नेल फंगस? जानें, इसके प्रकार, कारण और इलाज

नेल फंगस एक नाखून संबंधी बीमारी है। जो हाथों की उंगलियों और अंगूठों में संक्रमण के कारण होती है। इस प्रकार का कवक संक्रमण नाखूनों में देखने को मिलता है। जिसे ओनिकों माइकोसिस (onychomycosis) के नाम से जाना जाता है। यह संक्रमण हाथ के नाखूनों के अलावा पैर के नाखूनों में भी हो सकता है। जिसकी वजह से नाखून रंगहीन, काले और मोटे हो जाते हैं। साथ ही नाखूनों में दरारे पड़ने लगते हैं।

आजकल यह एक आम समस्या बन गई है। इसका मुख्य कारण गंदगी, प्रदूषण, नाखूनों की साफ-सफाई न करना, सिंथेटिक मोजे और पैरों में बहुत देर तक पसीना जमा रहना आदि होता है। हालांकि, यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। लेकिन ज्यादातर यह समस्या युवाओं की अपेक्षा बुजुर्गों में अर्थात 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में नजर आती है। जिसका समय रहते इसका इलाज न कराने पर यह दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है। परिणामस्वरूप यह एक गंभीर समस्या साबित हो सकती है।

नेल फंगस के प्रकार-

सामान्यतः नेल फंगस चार प्रकार के होते हैं, जो निम्न हैं:

डिस्टल सबंगुअल ओनिकों माइकोसिस (Distal Subungual Onychomycosis)-

यह नेल फंगस का सामान्य प्रकार होता है। जो व्यक्ति के नाखून की नोक (नाखून का अग्र भाग) को संक्रमित करता है। इससे संक्रमित व्यक्ति के नाखून का आगे का हिस्सा टूट जाता है। साथ ही नाखून के आसपास क्षेत्र में सूजन आ जाती है। इसके अलावा सबंगुअल क्षेत्र यानी नाखून के नीचे का हिस्सा मोटा होने लगता है।

व्हाइट सुपरफिशियल ओनिकों माइकोसिस (White Superficial Onychomycosis)-

नेल फंगस के इस प्रकार में नाखूनों की ऊपरी परत प्रभावित होती है। लेकिन कुछ समय यह नाखून के कॉर्निफाइड लेयर यानी भीतरी परत को प्रभावित करने लगता है। दिन-प्रतिदिन यह संक्रमण फैलता रहता हैं। जिससे नाखून खुरदुरे, नाजुक और टेढ़े होने लगते हैं।

कैंडिडा संक्रमण(Candida Infection)-

कैंडिडा संक्रमण एक तरह की गंभीर समस्या होती है। यह नाखून को प्रभावित करने के अलावा नाखून से चिपकी त्वचा को भी प्रभावित करती है। इस दौरान नाखून उंगलियों से अलग हो जाते हैं। आमतौर पर यह संक्रमण पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है। इसके अलावा कैंडिडा नेल फंगस ज्यादातर मिडिल फिंगर यानी मध्य उंगली में पाया जाता है।

प्रॉक्सिमल सबंगुअल ओनिकों माइकोसिस (Proximal Subungual Onychomycosis)-

नेल फंगस का यह प्रकार ज्यादातर उन लोगों में देखने को मिलता हैं, जो पहले से ही एचआईवी या किसी गंभीर बीमारी से संक्रमित होते हैं। प्रॉक्सिमल सबंगुअल ओनिकों माइकोसिस संक्रमण नाखून के जड़ को प्रभावित करता है। इसके अलावा प्रॉक्सिमल सबंगुअल ओनिकों माइकोसिस पैर की त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है।

नाखून की बीमारी (नेल फंगल) के कारण-

आस पास के वातावरण में कई तरह के फंगस विद्यमान रहते हैं। यह रोगाणुओं की तरह ही होते हैं। यह कवक (फंगस) हवा, पानी, मिट्टी आदि स्थानों पर विकसित एवं पर्यावरण के प्रभाव के कारण निरंतर बढ़ते हैं। वहीं कवक मानव शरीर में भी रहते हैं। जो शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए बने रहते हैं। कुछ फंगस शरीर के लिए हानिकारक भी होते हैं। यही हानिकारक फंगस जब शरीर पर आक्रमण करते हैं तो उन्हें खत्म करना मुश्किल होता है। क्योंकि वह हर तरह के वातावरण में जीवित रहने में सक्षम होते हैं। यह हानिकारक फंगल नाखून या उसके आसपास की त्वचा में मौजूद छोटी-छोटी दरारों से नाखून में प्रवेश कर जाते हैं। जो संक्रमण का कारण बनते हैं। इसके अलावा नाखून की बीमारी के कुछ अन्य कारण भी होते हैं। चलिए नजर डालते हैं इन्हीं अन्य कारणों के बारे में। जोकि निम्नलिखित हैं:

  • नाखून में चोट लगना।
  • नाखूनों की सर्जरी होना।
  • मधुमेह (डायबिटीज) से ग्रसित होना।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना।
  • टाइट जूते पहनना।
  • स्विमिंग पुल में ज्यादा देर तक स्नान करना।
  • सार्वजानिक स्थानों पर नंगे पैर चलना।
  • लगातार नमी वाले स्थानों में रहना।

नेल फंगल संक्रमण के लक्षण-

  • नाखून के रंग में परिवर्तन जैसे पीला, भूरा या सफेद होना।
  • नाखून की परत का मोटा होना।
  • टूटे या फटे हुए नाखूनों का होना।
  • नाखून के आकार में बदलाव या उसमें दरार पड़ना।
  • नाखून का कड़क होना।
  • नाखून की प्राकृतिक चमक का खत्म हो जाना।
  • नाखून के किनारे सफेद या पीले रंग की धारियों का बनना।
  • नाखून का ढीला होना या ऊपर उठना।
  • नाखून के अंदर किसी पदार्थ का फंसना।
  • नाखून में मवाद का एकत्रित होना।
  • इसे छूने में कोमलता या दर्द का अहसास होना।
  • पैरों की उंगलियों के आस-पास सूजन होना।

नेल फंगस के उपचार-

ओरल एंटीफंगल ड्रग्स-

नेल फंगस के पारंपरिक इलाज में डॉक्टर ओरल एंटीफंगल ड्रग्स लेने की सलाह देते हैं। जिसमें कई तरह के एंटी फंगल क्रीम और कुछ ओरल मेडिसिन शामिल हैं। यह दवाएं संक्रमण को तेजी से खत्म करती हैं। ओरल एंटीफंगल ड्रग्स के माध्यम से संक्रमण को पूरी तरह से छुटकारा दिलाने में कम से कम 3-4 महीने लग जाते हैं।

मेडिकेटिड नेल पॉलिश का उपयोग-

डॉक्टर नेल फंगस के इलाज के लिए एक मेडिकेटिड नेल पॉलिश का प्रयोग करने की सलाह देते हैं। जिसे साइक्लोपीरॉक्स कहते हैं। इसका प्रयोग  संक्रमित नाखूनों और इसके आसपास की त्वचा पर दिन में एक बार करने से संक्रमण से निजात मिलती है।

मेडिकेटिड नेल क्रीम-

मेडिकेटिड नेल पॉलिश के अलावा डॉक्टर एंटी फंगल क्रीम का भी सुझाव देते हैं।

सर्जरी-

जब संक्रमण गंभीर और दर्दनाक हो जाता है तो इस स्थिति में डॉक्टर सर्जरी कराने की सलाह देते हैं। इस स्थिति में नाखून को अस्थायी रूप से हटाया जाता है।

नेल फंगस के घरेलू उपचार-

  • टी ट्री ऑयल के लाभकारी गुण नाखून की बीमारी के लिए बेहद कारगर होते हैं। दरअसल, इस तेल में मौजूद एंटीबैक्टीरियल यौगिक नाखून एवं त्वचा संबंधित संक्रमण को फैलने से रोकते हैं और एंटीऑक्सीडेंट खुजली और रूखी त्वचा को ठीक करने में कारगर होते हैं। इसके लिए टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदो को कैरियर ऑयल में मिलाकर नाखून और उसके आसपास के क्षेत्र में लगाएं।
  • अजवाइन का तेल भी नाखून की बीमारी के लिए कारगर साबित होते हैं। दरअसल, इस तेल में मौजूद एंटीबैक्टीरियल यौगिक नाखून एवं त्वचा संबंधित संक्रमण को फैलने से रोकते हैं। इसके लिए अजवाइन के तेल की कुछ बूंदो को कैरियर ऑयल में मिलाकर नाखून और उसके आसपास के क्षेत्र में लगाएं।
  • नेल फंगस होने पर गुनगुने पानी में बेकिंग सोडा या फिटकरी डाल कर नाखून और उसके आसपास की त्वचा को धोएं । ऐसा करने से नेल फंगस की समस्या से राहत मिलती है।
  • नेल फंगस होने पर एप्पल साइडर विनेगर एक अन्य प्रभावशाली उपचार है। इसके लिए गुनगुने पानी में एक टेबल स्पून एप्पल साइडर विनेगर मिलाएं। अब इस पानी में पैरों या हाथों को डूबा रहने दें। कुछ समय बाद इसे तौलिए से अच्छी तरह से पोंछ लें। ऐसा करने से नाखून और त्वचा संबंधी संक्रमण में आराम पहुंचता है।
  • लहसुन एंटी बायोटिक गुण से समृद्ध है। यह नाखून में संक्रमण एवं फंगल इंफेक्शन को ठीक करने में मदद करता है। इसके लिए कुछ कच्चे लहसुन की कलियों को लेकर पेस्ट बनाकर नाखून और उसके आसपास त्वचा पर लगाएं। ऐसा करने से घाव जल्दी भरते हैं। इसके अलावा कच्चे लहसुन के रस को भी नाखून पर लगाने से संक्रमण में आराम मिलता है।
  • नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर नाखूनों को धोने या गाय के दूध में नीम की पत्तियों को पीसकर संक्रमित हिस्से पर लगाने से फंगल इंफेक्शन ठीक हो जाते हैं।
  • एलोवेरा में एंटी इंफ्लेमेंटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं। जो नाखून संबंधी संक्रमण को फैलने से रोकते हैं। इसके लिए एलोवेरा जेल को संक्रमित नाखून वाली जगहों पर लगाएं।
  • नारियल तेल भी नेल फंगस से राहत दिलाने में कारगर साबित होते हैं। क्योंकि इसमें एंटी माइक्रोबियल और एंटी इंफ्लेमेंटरी गुण पाए जाते हैं। जो फंगल इंफेक्शन से छुटकारा दिलाते हैं। इसके लिए दिन में 2-3 बार नारियल तेल को संक्रमित नाखून वाली जगहों पर लगाएं।

 

 

 


Older Post

Added to cart!
Welcome to Vedobi Store You're Only XX Away From Unlocking Free Shipping You Have Qualified for Free Shipping Spend XX More to Qualify For Free Shipping Sweet! You've Unlocked Free Shipping Free Shipping When You Spend Over $x to Welcome to Vedobi Store Sweet! You’ve Unlocked Free Shipping Spend XX to Unlock Free Shipping You Have Qualified for Free Shipping