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जानें, संतरे के औषधीय गुण एवं फायदों के बारे में

जानें, संतरे के औषधीय गुण एवं फायदों के बारे में

2022-03-17 12:37:31

संतरा लोकप्रिय और पौष्टिक फलों में से एक है। इसके खट्टे-मीठे स्वाद और रस से भरपूर होने के कारण संतरे को लगभग सभी लोग पसंद करते हैं। अक्सर लोग संतरे को छिलकर या जूस के रूप में सेवन करते हैं। वहीं, संतरे के जूस का इस्तेमाल कई तरह के पेय पदार्थों और लजीज व्यंजनों को बनाने में भी किया जाता है। इस फल में खूब विटामिन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसके अलावा संतरे में भरपूर औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। इसलिए संतरा खाने से शरीर का कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित और दिल दुरुस्त रहता है। इसलिए भोजन में संतरा को शामिल करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं।

 
संतरे के प्रकार-

मौसम, जलवायु, वातावरण, मिट्टी आदि कई ऐसे कारक हैं। जिनके आधार पर संतरे को वर्गीकृत किया गया है। आइए जानते हैं इसके प्रकारों के बारे में :

 
मैंडरिन संतरा (Mandarin Orange)-

मैंडरिन संतरे का पेड़ अन्य संतरे के पेड़ों की अपेक्षा छोटा होता है। इसका छिलका अन्य संतरे के मुकाबले पतला और खाने में मीठा होता है। संतरा का यह प्रकार चीन में सबसे ज्यादा पाया जाता है।

 
नेवल संतरा (Navel Orange)-

संतरे की यह प्रजाति सबसे ज्यादा भारत में पाई जाती है। इसमें बीज कम होते हैं। इसके अलावा संतरे का यह रूप बेहद मीठा और रसदार होता है। नेवल संतरा भारत के अलावा ब्रज़ील और फ्लोरिडा में भी पाया जाता है।

 
ब्लड संतरा (Blood Orange)-

संतरा का यह प्रकार देखने में बाहर से नारंगी होता है। और अंदर से रंग लाल होता है। जिसका मुख्य कारण इसमें मौजूद एंथीसायनिन्स (anthocyanins) नाम का यौगिक होता है। इसलिए इसे ब्लड संतरा के नाम से जाना जाता है। ब्लड संतरा खाने में रसीला होता है। संतरे की यह प्रजाति ज्यादातर कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में पाई जाती है।

 
टैंजरीन संतरा (Tangerine Orange)-

संतरे का यह प्रकार स्वाद में खट्टा और मीठा होता है। इसका छिलका मुलायम होता है। टैंजरीन संतरा में अन्य संतरो की अपेक्षा विटामिन सी की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। यह यू.एस और नार्थ अमेरिका में ज्यादा पाया जाता है।

 
कलेमेंटिन संतरा (Clementine Orange)-

कलेमेंटिन संतरा मुलायम होता है। वही, इसमें बीज भी नहीं होते। खाने में यह संतरा मीठा और रसीलेदार होता है। यह नार्थ अफ्रीका, कैलिफोर्निया आदि जगह पर पाए जाते हैं।

 
आयुर्वेद में संतरा का महत्व-

आयुर्वेद के अनुसार संतरा तासीर से ठंडा होता है। संतरे में विटामिन ए, सी, बी6, फोलेट के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स जैसे पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और सेलेनियम पाए जाते हैं। जो स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए फायदेमंद होते हैं। इनका सेवन कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। इस रूप में संतरा हृदय संबंधित रोग और अन्य बीमारियों से बचाव करने में भी मदद करता है। अपने औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण संतरे को आयुर्वेद में उत्तम दर्जे का फल माना गया है।

 
संतरे के फायदे-
ह्रदय को स्वस्थ्य बनाए रखने में सहायक-

संतरा हृदय को स्वस्थ रखने में बेहद लाभदायक होता है। इसमें कई प्रकार के फायटोन्यूट्रियन्ट्स पाए जाते हैं। जिनमें से पोटैशियम और विटामिन-सी ह्रदय प्रणाली की रक्षा करने में सक्षम होते हैं। यह हृदय पर ऑक्सीडेशन से होने वाली क्षति पर रोक लगा कर हृदय रोगों को बढ़ने से रोकते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने का काम करता है। जो एक स्वथ्य हृदय के लिए बहुत जरूरी होता है।

 
प्रतिरक्षा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में कारगर-

संतरे का सेवन शरीर की इम्यूनिटी में सुधार करता है। क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी और ई पाए जाते हैं। जो एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि के रूप में काम करते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें मौजूद पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड बॉडी को ऑक्सीकरण से भी बचाता है।

 
शरीर में पानी की कमी होने पर-

गर्मियों के मौसम में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है। फलस्वरूप कमजोरी, चक्कर और निम्न रक्तचाप जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसे में संतरे के जूस का सेवन करना एक अच्छा विकल्प है। क्योंकि इस फल में पानी की मात्रा 87% तक होती है। जो शरीर में पानी की मात्रा को कम नहीं होने देता।  

 
लू से बचाने में कारगर-

अक्सर गर्मियों के दिनों में लू लगने से तमाम शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों से लोग ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें इससे बचने के लिए अपने आहार में संतरे को शामिल करना चाहिए। क्योंकि दिन में 3-4 बार संतरे का रस पीना फायदेमंद साबित होता है।

 
तनाव और थकान हेतु-

चिंता, थकान, तनाव आदि की वजह से होने वाले सिरदर्द को कम करने में संतरे का जूस फायदेमंद होता है। एक गिलास संतरे के जूस का सेवन, तन और मन को शीतलता प्रदान करता है। यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम (Central Nervous System) पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके अतिरिक्त संतरे का तेल भी फायदेमंद होता है। इसमें एक ताजी मनमोहक सुगंध होती है। जो मानसिक संतुष्टि और खुशी की भावना को बढ़ाती है। जिससे व्यक्ति अच्छा फील करता है। परिणामस्वरूप चिंता, तनाव, थकान, सिरदर्द आदि में आराम मिलता है। 

 
मधुमेह के लिए-

संतरा डायबिटीज से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए भी जाना जाता है। संतरे का जूस शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। वहीं, संतरे में मौजूद मैग्नीशियम और कार्बोहाइड्रेट चयापचय को नियंत्रित करता है। इसके अलावा संतरे में फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। जो डायबिटीज के टाइप 2 उपचार में सहायक होता है। इसलिए डायबिटीज के लक्षणों को कम करने के लिए नियमित रूप से संतरे के जूस का सेवन करना चाहिए।

 
ब्लड प्रेशर के लिए-

ब्लड प्रेशर को लो होने से बचाने के लिए सबसे जरूरी होता है, शरीर में सोडियम की मात्रा को संतुलित रखना। ऐसे में संतरे को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि यह सोडियम से भरपूर होता है। जो ब्लड प्रेशर को नार्मल रखते हुए रक्तचाप को ठीक करता है। इसके अलावा इसमें पोटैशियम और पेक्टिन जैसे आवश्यक तत्व पाए जाते हैं। जिसका मुख्य काम नसों को आराम पहुंचाने का होता है। इसके साथ ही यह शरीर में रक्त के प्रवाह को भी सामान्य बनाए रखने में सहायता करता है। जिससे शरीर में रक्तचाप सामान्य बना रहता है।

 
कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक-

आजकल गलत खान-पान और लाइफ स्टाइल के कारण खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती चली जाती है। परिणामस्वरूप ह्रदय संबंधित रोगों को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में संतरे के जूस का सेवन करना अच्छा होता है। क्योंकि इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और विटामिन बी आदि तत्व मौजूद होते हैं। जो शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स (एक तरह का खराब कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को कम करता है। इसके अलावा संतरे में पेक्टिन पाया जाता है। जो एक प्रकार का घुलनशील फाइबर है। यह शरीर से कोलेस्ट्रोल को कम करने में सहायता करता है।

 
किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार करने में-

संतरे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट किडनी स्टोन, बार-बार पेशाब आना, मूत्राशय की उच्च गतिविधि आदि जैसे किडनी से संबंधित समस्याओं को ठीक करने और रोकने में मदद करते हैं। जिससे किडनी की सही कार्यप्रणाली सुनिश्चित होती है। इस प्रकार संतरे के जूस का सेवन किडनी की समस्या से बचाव में सहायक होता है। एक शोध के अनुसार रोजाना संतरे का जूस पीने से किडनी में होने वाले कैंसर से भी बचाव होता है।

 
कब्ज के लिए-

बदलते परिवेश और गलत खान-पान के कारण अक्सर लोग कब्ज से परेशान रहते हैं। इससे निजात पाने के लिए फाइबर युक्त डाइट लेनी चाहिए। वहीं, संतरे में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। जो कब्ज की परेशानी को कम करने में मदद करती है। 

 
कैंसर से बचाव में असरदार-

संतरा एंटीऑक्सीडेंट एवं विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है। इसलिए यह कैंसर को शरीर पर कब्जा करने और ट्यूमर के विकास को रोकता है। साथ ही कैंसर की कोशिकाओं (cancer cells) को नष्ट भी करता है। जापान में हुई एक अध्ययन के मुताबिक मैंडरिन संतरा लिवर कैंसर के खतरे को कम करता है। इस संतरे में लाइमोनिन पाया जाता है। जो शरीर में 8 से 10 घंटे तक एक्टिव रहते हैं। इस प्रकार यह शरीर में कैंसर को बढ़ने से रोकने में मदद करता है।

 
गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद-

गर्भवती महिलाओं के लिए संतरे का जूस पीना बहुत फायदेमंद होता है। इसके नियमित सेवन से प्रसव के वक्त होने वाली प्रसव पीड़ा कम होती है। साथ ही बच्चे स्वस्थ पैदा होता है।

 
गठिया में असरदार-

संतरे में एंटीऑक्सीडेंट एवं तमाम मिनरल्स पाए जाते हैं। जो गठिया की बीमारी और उससे होने वाले दर्द से राहत दिलाने में असरदार होते हैं। इसके अलावा संतरा ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी को भी दूर करने में कारगर होता है। इसके लिए प्रतिदिन एक गिलास संतरे का जूस पीना फायदेमंद होता है।

 
पैरों की बदबू को दूर करने में सहायक-

अक्सर गर्मियों के मौसम में कुछ लोगों को जूते पहनने से पैरों से बदबू आती है। ऐसे में संतरे के छिलके बहुत मददगार साबित होते हैं। इसके लिए संतरे के छिलकों को पानी में उबाल लें। अब इस गुनगुने पानी में अपने पैरों को कम से कम 5 मिनट के लिए डुबोकर रखें। उसके बाद अपने पैरों को निकालकर तौलिये से पोंछ लें। ऐसा हफ्ते में तीन से चार बार करें। ऐसा करने से पैरों से आने वाली बदबू दूर होती है।

 
सांसों की बदबू को दूर करने में सहायक-

ऑरेंज टी यानी संतरे की चाय, मौखिक स्वच्छता बनाए रखने का काम करती है। इसके लिए रोजाना एक कप ऑरेंज टी पीने से सांसों की बदबू दूर होती है। साथ ही मौखिक स्वच्छता में सुधार होता है।

 
त्वचा के लिए लाभप्रद-

संतरे का सेवन त्वचा के लिए बेहद अच्छा होता है। यह त्वचा की सेहत का ध्यान रखने का काम करता है। इसमें मौजूद एंटीआक्सीडेंट विटामिन सी त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों को दूर करता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ई भी त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा संतरे के छिलके को पीसकर चेहरे पर फेस मास्क की तरह यूज किया जाता है। ऐसा करने से फाइन लाइन, मुहांसे, झुर्रियों और एजिंग की समस्या दूर होती है। है। यह फेस मास्क त्वचा की लोच में सुधार करता है और इसकी नमी के स्तर को बनाए रखता है।

 
बालों के लिए फायदेमंद-

संतरा एक पौष्टिक फल हैं। जिसका सेवन बालों के लिए हितकारी होता हैं। इसमें मौजूद पोषक तत्व बालों को स्वस्थ्य बनाने और उन्हें मजबूती प्रदान करने का काम करते हैं। इसमें मौजूद विटामिन ई बालों को जरूरी पोषण देता है। साथ ही बालों के विकास को भी बढ़ावा देने का काम करता है। इसके अलावा संतरे को ब्लैंडर में डालकर पेस्ट बनाकर बालों की जड़ों में लगाएं। इसके बाद बालों को एक घंटे के लिए छोड़ दें और फिर पानी से धो लें। ऐसा करने से बालों का झड़ना भी कम होता हैं। साथ ही डैंड्रफ से भी छुटकारा मिलता है।

 
संतरे के नुकसान-
  • संतरे का अधिक सेवन करने से पेट में ऐंठन, दर्द और मतली जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है।
  • जो लोग बीटा ब्लॉकर्स मेडिसिन का सेवन करते हैं। उन्हें संतरे के सेवन से बचना चाहिए।
  • संतरे में एसिड की उच्च मात्रा होती है। जो हार्टबर्न जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं। विशेषकर हार्टबर्न से ग्रसित लोगों को इससे बचना चाहिए।
  • छोटे बच्चों को ज्यादा संतरा नहीं खिलाना चाहिए। अन्यथा पेट दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी अधिक संतरा नहीं खाना चाहिए।
  • जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है। उन लोगों को संतरे के छिलके का प्रयोग पैच टेस्ट करने के बाद ही करना चाहिए। क्योंकि अधिक संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इससे एलर्जी की समस्या हो सकती है।
  • संतरे के पेस्ट का उपयोग करने पर यदि खुजली, लालिमा, जलन या अन्य प्रतिकूल प्रभाव का अनुभव हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।
कहां पाया जाता है संतरा-

भारत में संतरा आमतौर पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में पाया जाता हैं।

Disclaimer

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