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बैंगन के प्रकार, लाभ और नुकसान

By Anand Dubey June 28, 2021

बैंगन के प्रकार, लाभ और नुकसान

बैंगन फ्राई, बैंगन पकोड़ा, बैंगन का भर्ता, आलू बैंगन की सब्जी आदि न जाने कितने रूप में हम बैंगन का सेवन करते हैं। वहीं कुछ लोग बैंगन को बेगुण (जिसमें कोई गुण न हो) मानकर इसको खाने से बचते हैं तो कुछ लोगों को इसकी सब्जी या इससे बना व्यंजन ही पसंद नहीं होता। लेकिन असल में वह लोग बैंगन के गुण और इसके फायदों के बारे नहीं जानते। इसलिए निरंतर इससे दूरी बनाए रखने का प्रयास करते हैं। दरअसल बैंगन में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई अन्य जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। वहीं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट और फेनोलिक्स (कार्बोलिक एसिड) भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि बैंगन चेहरे पर ग्लो लाने, दिल संबंधी बीमारी को ठीक करने, मेमोरी बढ़ाने और बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

बैंगन के प्रकार:

जापानी बैंगन-

यह बैंगन देखने में पतला, आकार में लंबा और रंग में लगभग काला होता है। इसकी ऊपरी परत थोड़ी चमकदार होती है। इसको पकाकर खाने पर यह मुंह में पूरी तरह घुल जाता है और स्वाद में थोड़ा मलाई के समान महसूस होता है। बैंगन की इस किस्म की खेती ज्यादातर जापान में होती है।

चाइनीज बैंगन-

देखने में यह बैंगन भी जापानी बैंगन की तरह ही होता है। पर यह उसकी अपेक्षा थोड़ा ज्यादा बड़ा और थोड़ा मीठा भी होता है। इसमें रसदार गूदा ज्यादा और बीज कम होते हैं। इस बैंगन को ज्यादातर भूनकर खाया जाता है।

ग्राफिटी बैंगन-

इस बैंगन की बाहरी सतह पर धारीदार और बिखरे हुए निशान होते हैं। इसमें पाए जाने वाले बीज छोटे और छिलका पतला होता है। दरअसल इस बैंगन का नाम इसके रूप-रंग के आधार पर ही पड़ा है। यह बैंगन सामान्य रूप से हर आकर में पाया जाता है। इस बैंगन की खास बात यह है कि इसे हर तरह से पका कर खाया जा सकता है। इसी कारण बैंगन का यह प्रकार दुनियाभर में भी लोकप्रिय है। बैंगन के इस प्रकार को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है।

जैसे:- 

फेयरीटेल (Fairytale), पर्पल रेन (Purple Rain), शूटिंग स्टार्स (Shooting Stars), पेंडोरा स्ट्राइप्ड रोज (Pandora Striped Rose) और लिस्टडा डी गांडिया (Listada De Gandia)।

बियांका बैंगन- 

बैंगन का यह प्रकार इटालियन किस्म से संबंध रखता है। यह देखने में बड़ा, गोल आकार और सफेद रंग का होता है। इसका गूदा स्वाद में मीठा और मलाईदार होता है। इसलिए इसको भरवां और रसदार दोनों तरह से बनाकर खाया जा सकता है।

टैंगो बैंगन-

इस बैंगन की बाहरी त्वचा थोड़ी मोटी और गूदा अधिक मीठा एवं मलाईदार होता है। देखने में यह सफेद रंग और आकार में अंडे की तरह होता है। इस बैंगन की खास बात यह है कि काटने के बाद इसका रंग सफेद से पीला और समय बीतने के साथ इसका गूदा सख्त होने लगता है।

सैंटाना बैंगन-

यह बैंगन इटालियन किस्म का ही एक खास प्रकार है। जो साइज में बड़ा और दिखने में पानी की बूंद की तरह होता है। इसका रंग गहरा बैंगनी होता है। बैंगन की इस किस्म को ज्यादातर भूनकर, पकाने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

थाई बैंगन-

इस बैंगन की बाहरी त्वचा पर सफेद और पीली धारियां होती हैं। यह स्वाद में थोड़ा कड़वा, आकार में गोल्फ बॉल के समान और रंग में हल्का हरा होता है। इस बैंगन को पकाने के लिए इसके बीजों को निकालना जरूरी होता है।

बैंगन के फायदे;

डायबिटीज के लिए-

बैंगन में मौजूद फेनोलिक्स (कार्बोलिक एसिड) टाइप-2 डायबिटीज के खतरों को कम करने का काम करते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद फेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम कर, हाइपरग्लाइसीमिया (हाई ब्लड शुगर) के प्रभाव को कम करने में भी मदद करते हैं। इसलिए मधुमेह की समस्या में बैंगन का इस्तेमाल करना लाभकारी माना जाता है।

पाचन के लिए-

खाद्य पदार्थों पर की गई रिसर्च में बैंगन के विषय में पाया गया है कि स्टीम कुकिंग से बने बैंगन
में पाचक रसों को प्रेरित करने की क्षमता होती है। क्योंकि पाचक रस शरीर में भोजन को
पचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए बैंगन का सेवन पाचन तंत्र को सुधारने में मदद
करता है।

ऊर्जा के लिए-

बैंगन के फायदों में शरीर को तुरंत ऊर्जा देना भी शामिल है। दरअसल बैंगन कम वसा वाला ऊर्जा का बेहतरीन स्त्रोत है। इसलिए इसके सेवन से वसा (Fat) के बिना ही ऊर्जा हासिल की जा सकती है। इसलिए बैंगन को ऊर्जा प्राप्त करने का अच्छा साधन माना जाता है।

प्रतिरोधक क्षमता के लिए-

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए फोलिक एसिड, जिंक, सेलेनियम, आयरन, और विटामिन (ए, सी, डी, ई, बी-2, बी-6, बी-12) आदि तत्व अहम भूमिका निभाने का काम करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बैंगन में यह सभी तत्व पाए जाते हैं। इसलिए बैंगन का सेवन शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करने अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

अनिद्रा के लिए-

बैंगन में डोपामाइन और ऐसेटाइलकोलिन नाम के डाइटरी न्यूरोट्रांसमीटर (रसायन जो मानसिक संदेशों के संचार में सहायक होते हैं) मौजूद होते हैं। जो अनिद्रा की समस्या को दूर कर, दिमागी विकास के लिए फायदेमंद होते हैं। इस आधार पर बैंगन के औषधीय गुण अनिद्रा की समस्या में राहत देने का काम करते हैं।

एनीमिया के लिए-

एनीमिया के समय शरीर में आयरन और फोलेट की कमी होने लगती है। जिसके कारण शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं हो पाता। ऐसे समय में रोगी को आयरन और फोलेट युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने की सलाह दी जाती है। चूंकि बैंगन में फोलेट और आयरन दोनों तत्व पाए जाते हैं। इसलिए बैंगन का सेवन शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाकर शरीर के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

हृदय स्वास्थ्य के लिए-

बैंगन में विटामिन-ए, विटामिन-सी के साथ बी-कैरोटीन और पॉलीफेनोलिक कंपाउंड मौजूद होते हैं। जिनके चलते बैंगन में शक्तिशाली कार्डियो प्रोटेक्टिव प्रभाव पाया जाता है। इसलिए बैंगन का सेवन हृदय स्वास्थ्य को अच्छा रखने का उत्तम साधन है।

याददाश्त के लिए-

बैंगन में जिंक, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने और याददाश्त बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं। इसलिए बैंगन को दिमाग की कार्य क्षमता और याददाश्त क्षमता के लिए बढ़िया समझा जाता है।

बालों के लिए-

बैंगन में विटामिन ए, ई, फोलेट, आयरन, जिंक और नियासिन आदि तत्व मौजूद होते हैं। जो झड़ते बालों की समस्या को कम कर, बालों के विकास में मदद करते हैं। इसके अलावा यह सभी तत्व स्कैल्प को स्वस्थ रखने का काम भी करते हैं। इसलिए बैंगन को बालों के लिए भी अच्छा माना जाता है।

त्वचा के लिए-

बैंगन में विटामिन-ए, विटामिन-सी, विटामिन-ई, फैटी एसिड आदि तत्व पाए जाते हैं। जो त्वचा को मुंहासे, दाग धब्बे और झाइयों जैसी समस्याओं से मुक्त करने और अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने का काम करते हैं। इसके अलावा बैंगन में एंटी-एजिंग प्रभाव भी पाए जाते हैं। जो त्वचा से बढ़ती उम्र के लक्षणों को दूर कर, उसे कोमल बनाने का काम करते हैं। इसलिए बैंगन का इस्तेमाल त्वचा के लिए भी अच्छा होता है।

बैंगन के नुकसान-

● बैंगन पाचन क्रिया में सुधार करने का काम करता है। लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करना पेट की जलन का कारण बन सकता है।
● बैगन ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। इसलिए लो ब्लड शुगर से ग्रसित मरीजों को इसका सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए।
● गर्भवती महिलाओं को बैंगन के अधिक सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि शरीर में बैंगन की अधिकता बार-बार पेशाब आने की समस्या पैदा कर सकता है। जो भ्रूण के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
● जो लोग एंटी डिपेटेंट ड्रग्स (अवसाद रोधी) पर हों, उन्हें बैंगन के सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि यह उन दवाओं के साथ मिलकर शरीर में साइड-इफेक्ट कर सकता है।


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