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घी के अद्भुत लाभ और उपयोग

By Anand Dubey July 27, 2021

घी के अद्भुत लाभ और उपयोग

घी हर घर में आसानी से मिलने वाली चीजों में एक है। जिसका सेवन करना शरीर के लिए बढ़िया रहता है। इसलिए रोटियों पर लगाने और दाल एवं सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए घी का इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल घी में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देने का काम करते हैं। इसलिए कई तरह के व्यंजनों को बनाने के लिए घी का उपयोग किया जाता है।

अक्सर बड़े-बुजुर्ग भी बच्चों को घी खाने की सलाह देते हैं। क्योंकि उनका मानना है कि घी का सेवन करने से व्यक्ति शारीरिक रूप से मजबूत बनने के साथ लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। इसके अलावा घी शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। वहीं, घी अगर गाय का हो तो यह और भी ज्यादा गुणकारी हो जाता है।

क्या होता है घी?

भारत में पुराने समय से ही दूध और इससे बने कई तरह के उत्पादों का उपयोग होता आया है। जिनमें दही, मक्खन, पनीर, रबड़ी, खोया अर्थात मावा आदि शामिल है। इन्हीं उत्पादों में से एक उत्पाद ‘घी’ भी है। जिसे दूध से निकाली गई मलाई या मक्खन को पकाकर बनाया जाता है। मक्खन को जब अच्छी तरह से पकाते हैं तो एक समय के बाद उससे छाछ के अंश अलग हो जाते हैं और एक अलग तरह का पदार्थ प्राप्त होता है। प्राप्त हुए इस पदार्थ को ही घी कहा जाता है। चिकने और तैलीय पदार्थों के सभी प्रकारों में घी को सबसे अच्छा पदार्थ माना जाता है। क्योंकि यह अन्य औषधियों एवं पदार्थों के साथ मिलकर उनकी ताकत को और बढ़ा देता है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों के अलावा कई आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है।

घी के फायदे-

घी हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद होता है। यह शरीर को ताकत देने और इम्यूनिटी को बढ़ाने का काम करता है। जिससे शरीर को कई तरह के रोगों से बचाव करने में सहायता मिलती है। आइए चर्चा करते हैं घी के कुछ प्रमुख फायदों के बारे में-

प्रतिरोधक क्षमता के लिए-

घी पर की गई एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इसमें एक कंजगेटेड लिनोलेनिक एसिड (Conjugated Linolenic Acid) होता है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और शारीरिक कमजोरी को दूर करने में सहायता करता है।

पाचन के लिए-

शरीर की पाचन शक्ति का ठीक न होना, कई समस्याओं का कारण होता है। लेकिन आयुर्वेद के मुताबित घी के सेवन से शरीर की पाचन शक्ति में सुधार होता है। हालांकि घी का सेवन एक सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

खांसी के लिए-

खांसी होने के तमाम कारण होते हैं। और देखा जाए तो खांसी होना बेहद आम समस्या है। परंतु लम्बे समय तक खांसी रहना अच्छा नहीं होता। इसलिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार खांसी के समय घी का सेवन करना लाभप्रद साबित होता है। लेकिन ध्यान रहे बलगम (कफ) वाली खांसी के समय घी का सेवन कम से कम करना चाहिए।

आंखों के लिए-

घी में तमाम पोषक तत्व मौजूद होते हैं। विटामिन-ए भी इन्हीं तत्वों में से एक है। जो आंखों के लिए बेहत जरूरी होता है। चूंकि विटामिन-ए की कमी से आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इसलिए घी के सेवन से आंखों के दोषों को दूर किया जा सकता है।

हृदय स्वास्थ्य के लिए-

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) द्वारा प्रकाशित एक वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, घी शरीर के कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। रिपोर्ट के अनुसार घी को विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में मिलाने से उनमें एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव उत्पन्न होता है। जो शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है।

कमजोरी दूर करने के लिए-

जो लोग शारीरिक मेहनत करते हैं या जिम जाते हैं। उन्हें घी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि घी के सेवन से शरीर की ताकत बढ़ती है। इनके अलावा छोटे बच्चों एवं शिशुओं को भी आहार के रूप में घी जरूर खिलाना चाहिए। क्योंकि इससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का विकास होता है।

घाव, सूजन और निशान की रोकथाम के लिए-

घी में बैक्टीरिया को कम करने वाले हीलिंग गुण मौजूद होते हैं। इसलिए घी का उपयोग जब शहद के साथ किया जाता है तो यह और भी ज्यादा लाभप्रद साबित होता है। अत: घी और शहद का एक साथ इस्तेमाल करने से घाव भरने, सूजन को कम और घाव के निशानों को दूर करने में मदद मिलती है। ध्यान रहे शहद के साथ घी का उपयोग केवल लेप के रूप में प्रभावित हिस्से पर करना चाहिए। क्योंकि इस मिश्रण का सेवन करना हानिकारक साबित हो सकता है।

वात प्रभाव के लिए-

घी का लगातार सेवन करने से शरीर में वात के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। परिणामस्वरूप वात के प्रकोप से होने वाले रोग जल्दी से शरीर को नहीं लग पाते।

मानसिक रोगों के लिए-

आयुर्वेद के अनुसार घी का नियमित सेवन करने से याददाश्त और तार्किक क्षमता में बढ़ोतरी होती है। साथ ही कई मानसिक रोगों से छुटकारा भी मिलता है।

शुक्राणु के लिए-

शरीर में शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी होने पर प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। जिसका असर जन्म लेने वाली बच्चे पर भी पड़ सकता है। लेकिन जो लोग घी का सेवन करने हैं, उन्हें इस तरह की परेशानी होने के चांस कम हो जाते हैं। क्योंकि घी के सेवन से शुक्राणुओं की संख्या एवं गुणवत्ता में सुधार होता है। लेकिन शुक्राणु हेतु घी का सेवन चिकित्सक सलाहानुसार करना ज्यादा बेहतर होता है।

घी के उपयोग-

  • सबसे ज्यादा घी का सेवन रोटी पर लगाकर किया जाता है।
  • देसी घी को तमाम जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर, कई रोगों को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • घी का उपयोग दाल जैसी कई सब्जियों में तड़का लगाने के लिए किया जाता है।
  • दक्षिण भारत में घी का इस्तेमाल इडली, डोसा और उत्तपम जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों को बनाने के लिए किया जाता है।
  • घी का उपयोग तमाम मिष्ठान और पकवान बनाने के लिए किया जाता है।
  • काली मिर्च, अदरक और चीनी वाली चाय में घी डालकर पीना खांसी और गले के लिए अच्छा होता है।
  • तेज गर्मी के समय एक चम्मच घी में हल्की शक्कर मिलाकर खाने से गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  • किसी भी खाद्य पदार्थ को बनाने के लिए तेल के स्थान पर भी घी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

घी के नुकसान-

  • घी में विटामिन-ए की अच्छी मात्रा होती है। लेकिन विटामिन-ए का अधिक सेवन सिरदर्द, भूख में कमी, उल्टी और श्वास नली के जाम होने का कारण बन सकता है।
  • घी का अधिक सेवन अपच और दस्त की समस्या का कारण भी बन सकता है। इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

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