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अटैक्सिया के कारण, लक्षण और उपचार

अटैक्सिया के कारण, लक्षण और उपचार

26 September, 2022

अटैक्सिया या गतिभंग एक ऐसी बीमारी होती है। जिससे पीड़ित व्यक्ति किसी भी प्रकार का काम करने में असमर्थ रहता है। आमतौर पर यह स्थिति मांसपेशियों में नियंत्रण में कमी के कारण होता है। जिससे व्यक्ति को कई शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं जैसेचलना, फिरना, स्पष्ट रूप से बोलना, भोजन को निगलना, वस्तुओं को उठाना और अन्य गतिविधियों को करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

आमतौर पर गतिभंग मस्तिष्क के उस हिस्से को पंहुचे नुकसान का परिणाम होता है, जो मांसपेशियों के समन्वय (सेरिबैलम) को नियंत्रित करता है। यह मुख्य रूप से शराब के अधिक सेवन, कुछ दवाओं के अधिक सेवन, स्ट्रोक, ट्यूमर, सेरेब्रल पाल्सी, मस्तिष्क अध: पतन और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी विभिन्न स्थितियों के परिणामस्वरूप होता है। इसके अलावा वंशानुगत दोषपूर्ण जीन भी इस स्थिति का कारण बन सकते हैं।

अटैक्सिया (गतिभंग) के प्रकार

शरीर के प्रभावित अंगों के आधार पर गतिभंग के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं। यह सेंसरी, सेरेबेलर और वेस्टिबुलर गतिभंग हैं-

  • सेंसरी अटैक्सिया इस प्रकार का गतिभंग सोमाटोसेंसरी तंत्रिका तंत्र को नुकसान के कारण होता है। यह आमतौर पर दृष्टि और श्रवण जैसे संवेदी प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है। जिससे समन्वय बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
  • सेरेबेलर अटैक्सिया इस प्रकार के गतिभंग के लक्षण तब दिखाई देते हैं जब अनुमस्तिष्क (मस्तिष्क का वह भाग जो समन्वय को नियंत्रित करता है) में क्षति होती है।
  • वेस्टिबुलर अटैक्सिया-इस प्रकार का अटैक्सिया वेस्टिबुलर सिस्टम अर्थात कान के आतंरिक हिस्सों को प्रभावित करते हैं। जिससे चक्कर आना, मतली और सीधी रेखा में चलने में कठिनाई जैसे लक्षण नजर आते हैं।

अटैक्सिया के लक्षण-

अटैक्सिया के कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

  • स्पष्ट रूप से बोलने में कठिनाई होना। खड़े होने और चलने में परेशानी होना।
  • संतुलन और समन्वय खो देना।
  • भोजन को चबाने और निगलने में कठिनाई महसूस करना।
  • हाथों या पैरों का असंतुलन (आपसी तालमेल न) होना।
  • आंखों की गतिविधिया स्वयं होना।
  • हृदय विकार।
  • फेफड़ों में संक्रमण होना।
  • झटके आना।

अटैक्सिया रोग में, तंत्रिका तंत्र का एक विशेष भाग क्षतिग्रस्त या निष्क्रिय हो जाता है। सेरेबेलर अटैक्सिया नामक सबसे आम प्रकार अनुमस्तिष्क में पाया जाता है। सेंसरी गतिभंग, जो रीढ़ और परिधीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। साथ ही वेस्टिबुलर गतिभंग, जो आंतरिक कान और श्रवण नलिकाओं को प्रभावित करता है।

क्या अटैक्सिया को रोका जा सकता है?

वैसे तो अटैक्सिया का कोई इलाज नहीं है लेकिन उचित उपचार से लक्षणों को कम या प्रबंधित किया जा सकता है। अटैक्सिया होने के पीछे कई संभावित कारण हैं और यह किसी भी उम्र में हो सकता है। हालांकि, एक स्वस्थ जीवन शैली और अपने दिनचर्या में बदलाव करके स्ट्रोक और कैंसर सहित गतिभंग से जुड़ी कुछ स्थितियों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।

अटैक्सिया के कारण-

मस्तिष्क के उन हिस्सों में तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति या हानि, जो मांसपेशियों के समन्वय (सेरिबैलम) को नियंत्रित करती है। अटैक्सिया यानी गतिभंग का कारण बनते हैं। सामान्यतः सेरिबैलम ब्रेनस्टेम के पास मस्तिष्क के आधार पर स्थित ऊतक के दो मुड़े हुए टुकड़ों से बना होता है। मस्तिष्क का यह क्षेत्र संतुलन, आंखों की गति, निगलने और बोलने में मदद करता है। रीढ़ की हड्डी और सेरिबैलम को मांसपेशियों से जोड़ने वाली परिधीय नसों को नुकसान पहुंचाने वाले रोग भी अटैक्सिया का कारण बन सकते हैं। अटैक्सिया होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  • सिर की चोट सिर पर चोट लगने से मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचता है, जो किसी वाहन दुर्घटना में हो सकता है। यह अचानक और तीव्र सेरेबेलर अटैक्सिया का कारण बनता है।
  • स्ट्रोकमस्तिष्क में रुकावट या रक्तस्राव से गतिभंग हो सकता है। यह स्थिति तब होती है, जब मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में रक्त का प्रवाह बंद या गंभीर रूप से कम हो जाता है। जिससे मस्तिष्क के ऊतकों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क की कोशिकाएं मर जाती हैं।
  • सेरेब्रल पाल्सी-आमतौर पर यह बीमारी बच्चों के मस्तिष्क के प्रारंभिक विकास के दौरान, जन्म से पहले, जन्म के दौरान या उसके तुरंत बाद के नुकसान के कारण होता है। जो बच्चों के शरीर की गतिविधियों को नियंत्रण करने वाली क्षमताओं को प्रभावित करता है।
  • ऑटोइम्यून रोग- मल्टीपल स्केलेरोसिस, सारकॉइडोसिस, सीलिएक रोग और अन्य ऑटोइम्यून रोग अटैक्सिया का कारण बनते हैं।
  • पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोमयह एक दुर्लभ, अपक्षयी बीमारी है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली की एक घातक ट्यूमर (नियोप्लाज्म) की प्रतिक्रिया के कारण होती है। आमतौर पर यह फेफड़े, डिम्बग्रंथि, स्तन या लिम्फ कैंसर है। इसलिए कैंसर के निदान के महीनों या वर्षों पहले गतिभंग हो सकता है।
  • मस्तिष्क में असामान्यताएंमस्तिष्क में एक संक्रमित अंग (फोड़ा) गतिभंग का कारण बनता है। मस्तिष्क में कैंसर (घातक) या गैर-कैंसरयुक्त वृद्धि सेरिबैलम को नुकसान पहुंचाती है।
  • ऑटोइम्यून रोग- मल्टीपल स्केलेरोसिस, सारकॉइडोसिस, सीलिएक रोग और अन्य ऑटोइम्यून रोग अटैक्सिया का कारण बनते हैं।
  • मस्तिष्क में असामान्यताएंमस्तिष्क में एक संक्रमित अंग (फोड़ा) गतिभंग का कारण बनता है। मस्तिष्क में कैंसर (घातक) या गैर-कैंसरयुक्त वृद्धि सेरिबैलम को नुकसान पहुंचाती है।
  • विषाक्त प्रतिक्रिया- गतिभंग कुछ दवाओं का एक संभावित दुष्प्रभाव है। जिसमें विशेष रूप से बार्बिटुरेट्स जैसे फेनोबार्बिटोल; बेंज़ोडायजेपाइन जैसे शामक एंटी एपिलेप्टिक जैसे फ़िनाइटोइन और कुछ प्रकार की कीमोथेरेपी शामिल हैं। साथ ही विटामिन बी-6 विषाक्तता भी अटैक्सिया का कारण बनती है। इसके अलावा यदि आप कुछ दवाएं ले रहे हैं, वह भी उम्र से संबंधित समस्याएं पैदा कर सकती हैं।
  • शराब और नशीली दवाओं की विषाक्तता-सीसा या पारा जैसी अधिक धातु विषाक्तता और विलायक विषाक्तता जैसे कि पेंट थिनर, भी गतिभंग का कारण बनता है।
  • विटामिन ई, विटामिन बी-12, या थायमिन की कमीइन विटामिनों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करने में असमर्थता, शराब के दुरुपयोग या अन्य कारणों से इन पोषक तत्वों की कमी का होना भी अटैक्सिया का कारण बनता है।
  • थायराइडहाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म गतिभंग का कारण बन सकता है।
  • कोविड 19 संक्रमणयह संक्रमण गतिभंग का कारण बन सकता है। लेकिन आमतौर पर यह बहुत गंभीर मामलों में होता है।

अटैक्सिया के उपचार-

अटैक्सिया के उपचार रोग के कारण पर निर्भर करता है। यदि अटैक्सिया किसी अन्य बीमारी का लक्षण है, तो अंतर्निहित बीमारी का इलाज किया जाना चाहिए। अंतर्निहित बीमारी का इलाज करने से लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति को अटैक्सिया होने का मुख्य कारण स्ट्रोक है, तो इस स्थिति में उसका एकाधिक स्क्लेरोसिस के लिए सहायता दी जाती है। विटामिन की कमी के लिए विटामिन की खुराक लिया जाता है। यदि कोई सीलिएक रोग से पीड़ित है, तो उसे ग्लूटेन को खत्म करने के लिए ग्लूटेन मुक्त आहार लेने के लिए सलाह दिया जाता है। इसके अतिरिक्त कभी-कभी व्यक्ति को विशेषज्ञ से परामर्श लेने की आवश्यकता होती है जो लक्षणों का कारण बनने वाली स्थिति का इलाज करता है।

  • दवाएं- रिलुज़ोल, वरेनिक्लिन और एमान्टाडीन ऐसी दवाएं होती हैं, जो व्यक्ति की चाल और कंपकंपी में सुधार के लिए संतोषजनक परिणाम प्रदान करती हैं।
  • फिजिकल थेरेपी-फिजिकल थेरेपी चाल या गति नियंत्रण पर काम करती है। इसलिए अटैक्सिया से पीड़ित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में बेहद लाभकारी होता है।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के गतिभंग के लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो अपने डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। वह इस बीमारी के स्पष्ट कारण का पता लगाने में मदद करते हैं। साथ ही उस आधार पर उपचार शुरू करते हैं। निम्नलिखित कुछ लक्षणों को नजरअंदाज़ न करके तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें-

  • समन्वय या संतुलन में कमी महसूस करना।
  • चलने में अधिक कठिनाई महसूस करना।
  • अस्पष्ट बात करना या निगलने में परेशानी होना।

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