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अर्जुन और इसकी छाल का महत्व

अर्जुन और इसकी छाल का महत्व

25 May, 2022

अर्जुन एक सदाबहार पेड़ है (Importance of Arjuna), जो 60-80 फीट तक लंबा होता है। इसकी पत्तियां देखने में अमरुद की पत्तियों की तरह होती हैं। अर्जुन का वैज्ञानिक नाम टर्मिनेलिया अर्जुना (Terminalia arjuna) हैं। इस वृक्ष का बड़े पैमाने पर औषधि के रुप में प्रयोग किया जाता है। इसकी छाल (बाहरी परत) और रस को ज्यादातर जड़ी-बूटी के रुप में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी छाल का प्रयोग हृदय संबंधी समस्याओं, क्षय रोग (टीबी), कान का दर्द, सूजन, बुखार आदि के उपचार में किया जाता है।

 

आयुर्वेद में अर्जुन का महत्व (Importance of Arjuna)

आयुर्वेद के अनुसार अर्जुन तासीर से शीतल और स्वाद में कसैला होता है, जो हृदय, प्रमेह (डायबिटीज), मेद (मोटापा), व्रण (अल्सर), कफ और पित्त के अलावा कटने एवं छिलने पर, विष और रक्त संबंधी रोग से बचाता हैं। अर्जुन कार्डियोप्रोटेक्टिव (Cardioprotective) और हृदय की मांसपेशियों को बल देने और उनकी पोषण-क्रिया को बेहतर बनाने का काम करता है। इसलिए अर्जुन का प्रयोग मुख्‍य रूप से दिल से संबंधित रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है। इसके प्रयोग से रक्त वाहिनियों से होने वाला रक्त स्राव कम होता है, जिससे सूजन कम होती है।

 

अर्जुन में कई प्रकार के पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ पाए जाते हैं, जो हड्डियों की समस्याओं में फायदा करते हैं। यह अल्‍सर (छाले) और मूत्र संबंधी रोगों के इलाज में भी लाभदायक होता है।

 

अर्जुन की छाल के फायदे;

 

अर्जुन की छाल का प्रयोग कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता हैं। दरअसल अर्जुन में बहुत से एंटीऑक्सिडेंट और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो स्‍वास्‍थ के लिए बेहद प्रभावी और लाभकारी होते हैं।

 

हृदय रोग में लाभदायक–

 

अर्जुन में एंटी-एथेरोजेनिक (anti-atherogenic) गुण पाए जाते हैं, जो कोरोनरी धमनियों के प्‍लेक बिल्‍डअप (plaque build-up) को कम करने और हृदय कोशिकाओं के रक्त परिवहन में सुधार करने का काम करते हैं। अर्जुन हृदय आघात (Heart attack) को कम करने में भी मदद करता है। इसलिए अर्जुन की छाल को हृदय रोगों के लिए लाभकारी औषधि माना जाता है।

 

सीने के दर्द को कम करने में उपयोगी–

 

अर्जुन हार्ट अटैक के समय होने वाले सीने के दर्द को कम करता है। इसलिए दिल के दौरा से पीड़ित लोगों को इसकी छाल का सेवन जरूर करना चाहिए है। इसके सेवन से भविष्‍य में भी सीने के दर्द की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

 

कोरोनरी धमनी के लिए फायदेमंद–

 

अर्जुन छाल का सेवन रक्त नसों और कोरोनरी धमनीयों (coronary arteries) की सूजन को कम करता है। इसका सेवन शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स, सीरम कोलेस्‍ट्रॉल, एथेरोजेनिक इंडेक्‍स और लिपोप्रोटीन को कम करता है, जो स्‍वास्‍थ को सकारात्मक रुप से प्रभावित करते हैं। अर्जुन की छाल कोरोनरी धमनी के अलावा कोलेस्‍ट्राल को भी कम करने में मदद करती है।

 

स्‍तन कैंसर के लिए लाभदायक औषधि–

 

अर्जुन की छाल में कासुआर्निन (Casuarinin) नामक एक रासायनिक घटक होता है, जो स्तन कैंसर के विषाणुओं की वृद्धि को रोकने में सहायता करता है। अर्जुन के एंटीऑक्सिडेंट गुण इस घटक को और प्रभावी बनाते हैं। इसलिए स्तन कैंसर के समय अर्जुन की छाल का सेवन करना फायदेमंद होता है।

 

अल्‍सर के लिए उपयोगी–

 

अर्जुन की छाल के टुकड़े को आठ घंटे पानी में भिगाकर इसका काढ़ा बनाएं और हल्का ठंडा होने के बाद इसका सेवन करें। इस तरह से अर्जुन की छाल का प्रयोग करने से पेट के अल्‍सर ठीक होते हैं और पेट स्‍वस्‍थ रहता है। दरअसल अर्जुन की छाल में मेथनॉल (Methanolic) हेलीकॉक्‍टर पिलोरी (helicobacter pylori) और लिपोपोलिसैक्‍साइड (lipopolysaccharide) तत्व होते हैं, जो गैस्ट्रिक अल्‍सर को रोकने में सहायता करते हैं।

 

क्षय रोग या टीबी में फायदेमंद–

 

अर्जुन का औषधीय गुण क्षय रोग (टीबी) के लक्षणों से आराम दिलाने में मदद करता है। इसके लिए अर्जुन की छाल, नागबला और केवांच (कौंच) के चूर्ण में शहद एवं घी मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से क्षय और खांसी जैसे रोगों में राहत मिलती है।

 

रक्तप्रदर (अत्यधिक रक्तस्राव) में उपयोगी–

 

महिलाओं में पीरियड्स के समय औसतन दिन से ज्यादा होने वाले रक्त स्राव को रक्तप्रद कहते हैं। ऐसे समय में एक चम्मच अर्जुन छाल के चूर्ण को एक कप दूध में डालकर दूध को आधे कप होने तक पकाएं। इसमें मिश्री घोलकर दिन में तीन बार सेवन करने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

 

बुखार को कम करने में कारगर–

 

बदलने मौसम के कारण होने वाले बुखार और अन्य समस्याओं को ठीक करने के लिए भी अर्जुन की छाल को अच्छा माना जाता है।

 
  • बुखान आने पर अर्जुन की छाल का काढ़ा या चाय बनाकर पीने से बुखार में राहत मिलती है।
  • एक चम्मच अर्जुन छाल के चूर्ण को गुड़ के साथ लेने से भी बुखार का असर कम होता है।

मुंहासों के लिए फायदेमंद–

 

अर्जुन की छाल में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट त्‍वचा के संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं। इसके लिए अर्जुन की छाल को पीसकर घोल के रूप में चेहरे पर लगाने से मुंहासे कम होते हैं। इसके अतिरिक्त अर्जुन वृक्ष के पत्तों को पीसकर उसमें शहद मिलाकर मुंहासों पर लगाएं और पंद्रह मिनट बाद गर्म पानी से मुहं धोएं। कुछ दिनों तक ऐसा करने से चेहरे के सभी मुंहासे खत्म हो जाएंगे।

 

दांतों के लिए लाभदायक–

 

अर्जुन की छाल मसूढ़ो के दर्द और खून बहने की समस्या में फायदा पहुंचाती है। इसी वजह से अर्जुन की छाल को टूथपाउडर (दंत मंजन) में भी इस्तेमाल किया जाता है।

 

यूरिनरी इन्फेक्शन में सहायक–

 

अर्जुन की छाल का सेवन यूरिनरी इन्फेक्शन (मूत्र संबंधी संक्रमण) में भी उपयोगी होता है। दरअसल अर्जुन की छाल में एंटीबैक्टीरियल प्रभाव पाया जाता है, जो मूत्र मार्ग में संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्म बैक्टीरिया को नष्ट करने का काम करता है।

 

हड्डी जोड़ने में करे मददगार–

 

अर्जुन की छाल के फायदे हड्डी के दर्द को ठीक करने और टूटी हड्डी को जुड़ने में लाभकारी सिद्ध होते हैं। इसके लिए कुछ हफ्ते तक दिन में तीन बार एक कप दूध के साथ एक चम्मच अर्जुन छाल के चूर्ण का सेवन करने से हड्डी मजबूत होती है। वहीं हड्डी टूटने पर इसकी छाल को पीसकर, घी के साथ प्रभावित जगह पर लगाकर पट्टी बांधने से हड्डी शीघ्र जुड़ जाती है।

 

कहां पाई जाती है अर्जुन की छाल? 

 

अर्जुन के पेड़ से ही अर्जुन की छाल प्राप्त होती है अथार्त अर्जुन के पेड़ की बाहरी परत को ही छाल कहा जाता है। अर्जुन का वृक्ष हिमालय की तराई और शुष्क पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित नदी-नालों के किनारे सबसे ज्यादा में देखने को मिलता है। इसी प्रकार भारत में भी यह वृक्ष अन्य स्थानों पर मौजूद नदी-नालों के किनारे देखे जा सकते हैं।

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