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इंद्रायण इसके फायदे और नुकसान

By Anand Dubey March 11, 2021

इंद्रायण इसके फायदे और नुकसान

इंद्रायण के फायदे – यह एक बारहमासी लता (बेल) है, जो भारत के बलुई क्षेत्रों के खेतों में उगाई जाती है। इंद्रायण के तीन प्रकार हैं। बड़ी इंद्रायण, छोटी इंद्रायण और लाल इंद्रायण। इसकी हर प्रकार की बेल पर लगभग 50-100 फल लगते हैं, जो कई तरह की स्वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं। इंद्रायन से प्राप्‍त लाभों में घावों को ठीक करना, मुंहासों का उपचार, कब्‍ज का इलाज, जोड़ों का दर्द,  बवासीर, आदि शामिल हैं।

आयुर्वेद में इंद्रायण का महत्व-

 आयुर्वेद के अनुसार इंद्रायण में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो अनगिनत बीमारियों के उपचार में सहायता करते हैं। इंद्रायण का वानास्पतिक नाम सिटुल्स कोलोसिंथिस (Citrullus colocynthis) है। जिसे कोलोसिंथ (Colocynth) के नाम से भी जाना जाता है। इंद्रायण का फल तरबूज के परिवार से संबंध रखता है, जो बुखार से निदान दिलाने, सूजन को कम करने, रक्त को साफ करने, कफ निसारक और मधुमेह (डायबिटीज) को नियंत्रित करने में सहायता करता है। प्रकृति से इंद्रायण तीखा और गर्म होता है, जो रेचक (पेट साफ़ करने), पित्तकफ, कामला (पीलिया), खांसी, सांस संबंधी समस्या, पेट के रोग, गांठ, व्रण (घाव), गुल्म (वायु का गोला), गलगण्ड (कंठमाला), प्रमेह (डायबिटीज), आमदोष (गठिया), अपच, अश्मरी (पथरी), श्लीपद (Filaria) और ज्वर आदि बीमारियों में लाभदायक होता है।

इंद्रायण के फायदे

इंद्रायण की जड़, पत्ते और फलों में कई पौष्टिकारक गुण होते हैं, जो स्वास्थ के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। आइए जाने इन्‍द्रायन के कुछ अन्य स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में-

कब्‍ज में लाभदायक-

इंद्रायण को कब्‍ज की समस्‍या के लिए फायदेमंद औषधि माना जाता है। इसका फल कब्‍ज और पेट की तमाम समस्‍याओं को दूर करने में मदद करता है। इंद्रायण फल रस निकालकर उसमें एक चौथाई चम्मच हींग, अजवाइन, इलायची, खड़ा नमक (rock salt) आदि मिलाएं। अब इस मिश्रण की एक चौथाई चम्‍मच को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर सेवन करें। ऐसा करने से कब्‍ज से जल्द छुटकारा मिलता है।

मधुमेह में फायदेमंद-

इंद्रायण के फायदे – इंद्रायण में एंटी-डाइबेटिक गुण होते हैं, जो मधुमेह को कम करने में मदद करते हैं। मुख्य रूप से इंद्रायण टाइप 2 मधुमेह (Type 2 diabetes) के रोगीयों के लिए अधिक फायदेमंद होता है। इसलिए टाइप 2 मधुमेह से ग्रस्त रोगीयों को इंद्रायण का सेवन करना चाहिए।

बवासीर के उपचार में कारगर-

इंद्रायण के औषधीय गुण बवासीर को ठीक करने में मदद करते हैं। इसके लिए इंद्रायण की जड़ और पिप्पली को पीसकर, छोटी गोलियां बना लें। इन गोलियों को सूरज की रोशनी में सुखाकर, पानी के साथ सेवन करें। नियमित रूप से ऐसा करने से बवासीर का प्रभाव कम होता है।

मुंहासों को कम करने सहायक-

इंद्रायण का प्रयोग कील-मुंहासे जैसी त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं के लिए भी किया जाता है। इसके लिए इंद्रायण की जड़ों को पीसकर रस निकाला जाता है। इस रस को मुंहासों पर लगाने से मुंहासों में मौजूद बैक्‍टीरिया मरने लगता और मुंहासे ठीक होने लगते हैं।

दर्द और सूजन को कम करने में मददगार-

इंद्रायण ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों की बीमारी) के दर्द और सूजन को कम करने में सहायता करता है। दरअसल इंद्रायण की जड़ के रस में इथेनॉल (ethanol) होता है। जिसके सेवन से सूजन वाली कोशिकाओं में प्रो-इंफ्लामेटरी साइटोकिन्‍स (pro-inflammatory cytokines) का स्‍तर कम हो जाता है। परिणामस्वरूप जोड़ों की सूजन और दर्द कम हो जाता है।

आंतों के कीड़ों के उपचार में फायदेमंद-

इंद्रायण जड़ी-बूटी का उपयोग पेट की समस्‍याओं को दूर करने बड़े पैमाने पर किया जाता है। इंद्रायण आंतों के कीड़ों को दूर करना में भी कारगर औषधि है। इसके लिए इंद्रायण की जड़ों को धोने और सुखने के बाद पीसकर पाउडर तैयार कर लें। सुबह के समय एक गिलास पानी में चुटकीभर पाउडर मिलाकर सेवन करने से आंतों के कीड़ों नष्‍ट होने लगते हैं।

बालों के लिए लाभदायक-

इंद्रायण को बालों के विकास के लिए टॉनिक के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है, जो बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा इंद्रायण तेल को सिर में लगाने से भी बालों का तेज विकास होता है। साथ ही बालों के झड़ने और सफेद बाल की समस्या भी कम होती है।

सिरदर्द से राहत दिलाने में मददगार-

तनाव एवं सिरदर्द होने पर इंद्रायण फल के रस को सर पर लगाने या इसकी जड़ के छाल को तिल के तेल में उबालकर, मस्तक पर लगाकर मालिश करने से सिरदर्द में आराम मिलता है।

स्तन के सूजन के इलाज में फायदेमंद-

किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण स्तन में आई सूजन पर इंद्रायण की जड़ को पीसकर लेप करने से स्तन की सूजन कम होती है।

पेट की बीमारियों के इलाज में लाभकारी-

इंद्रायण का औषधीय गुण पेट संबंधी विभिन्न बीमारियों को दूर करने में लाभप्रद होता है-

  • इंद्रायण का मुरब्बा पेट की समस्याओं में आराम करता है।
  • ताजे इंद्रायण फल के गूदे को गरम पानी के साथ और सूखे गूदे को अजवायन के साथ खाने से पेचिश (Dysentery) में आरम मिलता है।
  • इंद्रायण फल के गुदे को गरम करके पेट पर बांधने से आंतों के कीड़े मर जाते हैं।

फोड़ा के इलाज में लाभकारी-

इंद्रायण का औषधीय गुण फोड़ों के इलाज में लाभकारी होता है। सर्दी-गर्मी से शरीर पर फोड़े हो जाते हैं। ऐसे में इंद्रायण के फल को पीसकर नारियल तेल में मिलाकर लगाने से फूंसी- फोड़े ठीक होने लगते हैं। इसके अतिरिक्त लाल और बड़ी इंद्रायण की जड़ों को बराबर मात्रा में पीसकर लेप के रूप में फोड़े पर लगाने से भी लाभ मिलता है।

इंद्रायण के नुकसान

  • अधिक मात्रा में इंद्रायण का सेवन करना आंतों के नुकसान और रक्‍तस्राव से संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है।
  • इंद्रायण के अधिक सेवन कभी-कभी गंभीर दस्‍त की दिक्कत भी हो सकती है।
  • गर्भावस्‍था और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को इंद्रायण का सेवन डॉक्‍टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
  • स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या की दवाओं के साथ इंद्रायण का सेवन डॉक्‍टर की सलाह के अनुसार करें।

कहां पाया जाता है इंद्रायण?

पूरे भारत के बलुई क्षेत्रों (रेगितानी मिटटी) में इंद्रायण की बेल पाई जाती है। कई बार यह खेतों में अपने आप भी उग जाती है तो कई जगह पर इसकी खेती भी की जाती है। इंद्रायण बेल की लंबाई 20 से 30 फुट तक होती है।


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