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राजमा के अनसुने और अनदेखे फायदे एवं उपयोग

By Anand Dubey August 06, 2021

राजमा के अनसुने और अनदेखे फायदे एवं उपयोग

राजमा एक तरह की दाल है। जो देखने में लाल और हल्के भूरे रंग की लगती है। इसका आकार मनुष्य की किडनी की तरह होता है। इसके अलावा इसके बीज के ऊपरी छिलके का सुर्ख (ruddy) और चमकदार रंग किडनी के रंग जैसा होता है। इसलिए राजमा को किडनी बीन्स के नाम से भी जाना जाता है। राजमा का वैज्ञानिक नाम फैजियोलस वल्गैरिस है। ज्यादातर राजमा मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है। स्वाद में स्वादिष्ट होने के कारण लोग राजमा को ज्यादा खाना पसंद करते हैं।

राजमा बीन्स की श्रेणी में आता है और विश्व भर में इसका सेवन किया जाता है। इसलिए जायकेदार एवं स्वादिष्ट व्यंजनों में राजमा का अहम स्थान है। लेकिन ऐसा कतई नहीं है कि राजमा का इस्तेमाल सिर्फ खाने भर तक सीमित है। क्योंकि राजमा कई तरह की शारीरिक समस्याओं से निजात दिलाने में भी मदद करता है। राजमा में तमाम प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट और खनिज पदार्थ मौजूद होते हैं। जो शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का काम करते हैं। आयुर्वेद में भी इसके पौष्टिक गुण कई तरह की बीमारियों को दूर एवं ठीक करने में सहायता करते हैं। राजमा के सेवन से ह्रदय संबंधी रोग, कब्ज, कमजोरी जैसे अनेक रोगों में आराम मिलता है।  

राजमा में मौजूद पौष्टिक तत्व-

राजमा कई पौष्टिक तत्वों और खनिजों से भरपूर होता है। जो सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होते हैं। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, मैंगनीज, जिंक, प्रोटीन, विटामिन आदि शामिल होते हैं। इसके अलावा राजमा में ऊर्जा, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फाइबर और फैटी एसिड्स भी मौजूद होते हैं। यह सभी पोषक तत्व हमारे शरीर को रोगों से बचाते हैं।

राजमा के प्रकार-

वैसे राजमा कई प्रकार के होते हैं। लेकिन इसके कुछ महत्वपूर्ण प्रकार निम्नलिखित हैं;

काला राजमा-

राजमा का यह प्रकार मध्यम आकार और काले रंग का होता है। यह खाने में हल्का मीठा होता है।

गहरा लाल राजमा-

राजमा का यह प्रकार आकार में काले राजमा से थोड़ा बड़ा होता है। ज्यादातर गहरे लाल रंग के राजमा का उपयोग सूप और सलाद में किया जाता है।

हल्का लाल राजमा-

यह आकार में बड़ा होता है। इसे जल्दी नहीं पकाया जा सकता है। इसे पकाने में 1 से 2 घंटे का समय लगता है।

नेवी बीन्स-

राजमा का यह प्रकार भी आकर में छोटा होता है। पर इसे पकाने में भी 1 से 2 घंटे का समय लगता है।

गुलाबी रंग का राजमा-

यह राजमा छोटे आकार का होता है। इसे पकने में लगभग 1 घंटे का समय लगता है।

पिंटो राजमा-

राजमे का यह प्रकार मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र में पाया जाता हैं। इसका आकार मध्यम होता है।

ग्रेट नॉर्दर्न बीन्स-

राजमा का यह प्रकार मुख्य रूप से फ्रांस में पाया जाता है। इसकी ऊपरी सतह सफेद रंग की होती है। 

राजमा के फायदे-

वजन घटाने के लिए-

राजमा में प्रोटीन और फाइबर होता है। जो मोटापे को कम करने में मदद करता है। दरअसल राजमा में मौजूद प्रोटीन एवं फाइबर वसा के जमाव को रोककर चयापचय में सुधार करता है। इसके अलावा राजमा में कुछ रेसिस्टेंट स्टार्च (Resistant starch) भी पाए जाते हैं। जो भूख के एहसास को कम करके, वजन कम करने में मदद करता है।

हड्डियों एवं दातों के लिए उपयोगी-

राजमा हड्डियों और दातों को मजबूत बनाए रखने में मददगार होता है। क्योंकि इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन की उच्च मात्रा पायी जाती है। जो हड्डियों के विकास में सहायता कर, ऑस्टियोपोरोसिस (कमजोर और नाजुक हड्डियों) की बीमारी को रोकने में मदद करती है। राजमा का सेवन हड्डियों के अलावा दांतों के लिए भी काफी कारगर सिद्ध होता है। इसलिए हड्डियों के विकास और दातों को मजबूती प्रदान करने के लिए राजमा का सेवन करना अच्छा माना जाता है।

मधुमेह के लिए फायदेमंद-

किडनी बीन्स यानी राजमा में कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो मधुमेह की समस्या में हितकारी होते हैं। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, अनसैचुरेटेड फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट (मुक्त कणों के प्रभाव को रोकने वाला) गुण संयुक्त रूप से बढ़े हुए ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए मधुमेह रोगियों के लिए राजमा बहुत लाभकारी भोजन माना जाता है।

ब्लड प्रेशर को करे नियंत्रण-

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए अपने आहार में राजमा को शामिल करना बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि यह मैग्नीशियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर होता है। जो ह्रदय और रक्त वाहिकाओं की मांसपेशियों को आराम देता है। इसलिए राजमा का उपयोग करके ब्लड प्रेशर से बचा जा सकता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक-

शरीर में इम्यूनिटी (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने में पौष्टिक तत्वों और खनिजों की जरूरत पड़ती हैं। चूंकि राजमा फाइबर और कई तरह के विटामिन से समृद्ध है। यह शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। जो संक्रमण से लड़ने में सहायक होते हैं। साथ ही यह शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसी सुरक्षा कवच को इम्यूनिटी कहा जाता है। इस प्रकार रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करके छोटी-मोटी बीमारियां जैसे सर्दी-जुकाम, फ्लू आदि से बचा जा सकता है।

पाचन के लिए फायदेमंद-

राजमा में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। जो भोजन को पचाने में मदद करता है। यह डाइजेस्टिव जूस को उत्तेजित कर पाचन क्रिया में सकारात्मक प्रभाव डालने का काम करता है। जिससे शरीर के पाचन तंत्र के कार्य में सुधार होता है।

हृदय के लिए फायदेमंद-

हृदय को स्वस्थ रखने में राजमा बेहद लाभकारी होता है। क्योंकि राजमा में अच्छी मात्रा में आयरन और विटामिन पाया जाता है। जो दिल की धामियों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है। इसलिए अपने डाइट में राजमा का सेवन करने से हृदय सम्बंधित तमाम परेशनियां जैसे अनियमित दिल का धड़कना और हार्ट ब्लॉकेज आदि का खतरा कम हो जाता है।

कैंसर रोगी के लिए फायदेमंद-

राजमा का सेवन कैंसर के रोगियों के लिए भी अच्छा होता है। क्योंकि इसके सेवन से शरीर के अंदर बायोएक्टिव यौगिक की पूर्ति होती है। जो कैंसर से बचाने में मदद करते हैं। साथ ही इससे कई पुरानी बीमारियां भी स्वतः ठीक हो सकती हैं। इसके अलावा राजमा के साथ अन्य कोई एंटीऑक्सीडेंट खाद्य पदार्थ का सेवन करने पर यह शरीर में होने वाली ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया को कम कर देता है। साथ ही सामान्य स्वस्थ्य कोशिकाओं को बिना नुकसान पहुंचाए कैंसर कोशिकाओं का खात्मा करता है। इसलिए स्वस्थ्य कोशिकाओं के विकास एवं कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए राजमा के साथ एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना अच्छा विकल्प माना जाता है।

स्वस्थ्य दिमाग के लिए फायदेमंद-

दिमाग से जुड़ी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और उसकी सक्रियता को मेंटेन करने के लिए राजमा का सेवन करना अच्छा होता है। राजमा में कोलीन (choline) नामक जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जिससे एसिटाइलकोलाइन (acetylcholine) का निर्माण होता है। एसिटाइलकोलाइन एक प्रकार का न्यूरोट्रांसमीटर होता है। जो मस्तिष्क विकास और नर्वस सिस्टम को नियंत्रित करता है। इसके अलावा राजमा में मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है। जो मस्तिष्क के रक्त प्रवाह में सहायक और मस्तिष्क की चोट को जल्दी ठीक करने में कारगर साबित होता है। साथ ही मैग्नीशियम में कुछ एंटीडिप्रेसेंट गुण भी होते हैं। जो अवसाद और तनाव को दूर करने में मदद करते हैं। इसलिए राजमा को स्वस्थ दिमाग के लिए अच्छा माना जाता है।

एनर्जी बढ़ाने में मददगार-

एनर्जी के लिए पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी होता है। जो शरीर को ऊर्जा और स्फूर्ति प्रदान करता है। इसलिए सेहतमंद डाइट में राजमा को शामिल करना अच्छा विकल्प माना गया हैं। इसमें मिलने वाली एनर्जी शरीर को पूरे दिन एक्टिव रखने में मदद करती है। क्योंकि राजमा में विटामिन बी, ज़िंक, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पौष्टिक आहार पाए जाते हैं। जो शरीर में एनर्जी देने में सहायक होते हैं।

गर्भावस्था के लिए-

राजमा में कई ऐसे पोषक तत्व एवं खनिज पाए जाते हैं। जो गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इसमें फोलेट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे गर्भावस्था के दौरान राजमा के सेवन से गर्भवती महिलाओं को फोलेट की कमी नहीं होती। साथ ही इसमें पाए जाने वाले कैल्शियम और मैग्नीशियम गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और भ्रूण की हड्डियों के विकास में मदद करते हैं। इसके अलावा मैग्नीशियम जन्म के समय शिशु के वजन में होने वाली कमी और गर्भवती के बढ़ते रक्तचाप को रोकने में भी मदद करता है।

सेहतमंद त्वचा और स्वस्थ बालों के लिए-

सेहतमंद त्वचा और स्वस्थ्य बालों के लिए विटामिन सी जरुरी होता है। विटामिन सी से बाल मोटे, घने और स्वस्थ्य बनते हैं। साथ ही विटामिन सी त्वचा की सुंदरता में निखार लाने का भी काम करता है। यह सूरज से निकलने वाली पराबैगनी किरणों से भी बचाता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA) का प्रयोग त्वचा संबंधित कई रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अलावा राजमा में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड त्वचा के साथ बालों की स्थिति को भी बेहतर बनाता है।

राजमा के उपयोग-

  • राजमा को सब्जी के रूप में उपयोग में लाया जाता है।
  • राजमा का सूप बनाकर या उबालकर भी खाया जाता है।
  • फिटनेस के शौकीन इसे सलाद के रूप में उपयोग करते हैं।
  • राजमा को अंकुरित करके भी इसका सेवन किया जाता है।

राजमा के नुकसान-

  • चूंकि राजमा फाइबर से समृद्ध होता है। इसलिए इसका अधिक मात्रा में सेवन करना कब्ज और गैस की समस्या पैदा कर सकता है।
  • इसमें फोलिक एसिड की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसलिए इसका अधिक सेवन करने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
  • राजमा आयरन से भरपूर है। इसलिए इसका अधिक मात्रा में सेवन करना कब्ज, उल्टी और पेट में दर्द जैसी समस्या पैदा कर सकता है।
  • राजमा को उबालने से पहले 4 से 5 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखना चाहिए। क्योंकि कच्चा या अधपका राजमा शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

 


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