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क्या होती है अनंतमूल और इसके फायदे?

By Vedobi India May 07, 2021

क्या होती है अनंतमूल और इसके फायदे?

क्या होती है अनंतमूल और इसके फायदे?

अनंतमूल को कृष्ण सारिवा भी कहते हैं। यह एक प्रकार की लता होती है। जिसे बाग-बगीचों और मंदिरों एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में देखा जा सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक अनंतमूल एक बढ़िया जड़ी-बूटी है। इसकी मदद से अनेक रोगों का उपचार किया जाता है। बुखार, उल्टी, डायबिटीज, आंखों की बीमारी, ल्यूकोरिया, कुष्ठ रोग, मुंह के रोग, खुजली आदि बीमारियों में अनंतमूल के उपयोग से कई लाभ मिलते हैं।

कैसी होती है अनंतमूल?

अनंतमूल एक बेल है, जो हमेशा हरी रहती है। यह बहुवर्षीय बेल पतली, लंबी और आगे की ओर बढ़ने वाली, जमीन पर फैलने वाली, वृक्ष पर चढ़ने वाली होती है। इसकी लंबाई 5 से 15 फुट होती है। इसकी छाल श्यामले या काले रंग की और शाखाएं लाल-भूरे रंग की होती हैं। जिनपर हरे-सफेद और बैंगनी रंग के सुगन्धित फूल लगे होते हैं। इसकी जड़ से कपूर मिश्रित चंदन जैसी सुगंध आती है। इसके अलावा इसकी जड़ों को तोड़ने पर दूध जैसा पदार्थ निकलता है।

आयुर्वेद के अनुसार-

आयुर्वेदिक मतानुसार अनन्तमूल सुगंधित, तीखी, मीठी, कड़वी, शीतल, मधुर, भारी, वीर्यवर्धक (शुक्राणु का बढ़ना), स्निग्ध (चिकना), रक्तशोधक (खून को साफ करने वाला), त्रिदोषनाशक (वात, पित्त और कफ) प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने वाली औषधि होती है। इसके अलावा यह खांसी, बुखार, खुजली, जलन, त्वचा रोगनाशक, रक्तविकार (खून की खराबी), मंदाग्नि (अपच), स्वेदजनक (पसीना लाने वाला), मूत्र विरेचक (पेशाब लाने वाला), बलकारक, भूखवर्धक (भूख का बढ़ना), शरीर की दुर्गंध, श्वांस, विष, घाव और प्यास आदि परेशानियों में भी गुणकारी होती है। 

अनंतमूल के फायदे;

आंखों के लिए-

अनन्तमूल पौधे की जड़ से दूध निकालकर आंखों पर लगाने से आंखों की सूजन ठीक होती है। इसके अलावा किसी कीड़े के काटने पर होने वाली सूजन को ठीक करने के लिए अनन्तमूल के पत्ते को पीसकर उसके पेस्ट को हल्का गुनगुना करके सूजन वाले हिस्से पर लगाने से फायदा मिलता है।

बुखार के लिए-

अनंतमूल की जड़, पत्तों और उसके डंठल का काढ़ा बनाकर पीने से बुखार का ताप कम होने लगता है। इसके अलावा अनंतमूल के पत्तों को तेल में पकाकर इस्तेमाल करने से भी बुखार उतर जाता है।

मुंह और गले की बीमारी के लिए-

अनंतमूल पौधे के पंचांग (Almanac) से बने काढ़े से गरारे करने से जीभ की सूजन और दांतों से होने वाला रक्तस्राव कम होता है। वहीं इसके पंचांग को पीसकर बनाए लेप को गले पर लगाने से गले की सूजन जैसे कंठ रोगों में आराम लगता है।

सिर के रोग और रतौंधी के लिए-

अनंतमूल के पत्तों को तेल में अच्छे से पकाकर, छानकर ठंडा कर लें। अब इसे सिर पर लगाएं। इससे सिर संबंधी विकारों में लाभ होता है। वहीं अनंतमूल पौधे के पंचांग (Almanac) से बने काढ़े से आंखों को धोने से रतौंधी (रात का अंधापन) की बीमारी में फायदा होता है।

सूजाक और शारीरिक ऐंठन के लिए-

अनंतमूल पंचांग से बने काढ़े का सेवन करने से सूजाक (योनि से होने वाला विपुल स्राव) और शरीर की ऐंठन (जकड़न) में लाभ होता है।

डायबिटीज, मूत्र और तिल्ली रोगों के लिए-

वर्तमान समय में डायबिटीज एक आम बीमारी बन चुकी है। लेकिन अनंतमूल के प्रयोग से डायबिटीज पर नियंत्रण पाया जा सकता हैं। इसके लिए अनंतमूल की जड़ को पीसकर उसके चूर्ण का सेवन दूध के साथ करें। इससे मधुमेह कम होता है। वहीं अनंतमूल पंचांग के काढ़े का सेवन करने से प्लीहावृद्धि (तिल्ली का बढ़ना), रक्तमूत्रता (पेशाब में खून आना) आदि रोगों में भी लाभ होता है।

अपच और स्तन विकार के  लिए-

एक चम्मच अनंतमूल जड़ के चूर्ण में एक चम्मच सारिवा चूर्ण मिलाकर सेवन करने से अपच की परेशानी ठीक होने लगती है। वहीं इसकी जड़ के काढ़े में पिप्पली चूर्ण मिलाकर सेवन करने से प्रसव (Delivery) के बाद होने वाले स्तन संबंधी विकारों में फायदा होता है।

पेचिश और बवासीर के इलाज के लिए-

अनंतमूल पंचांग के चूर्ण का सेवन करने से पेचिश (Dysentery) की समस्या में आराम लगता है। इसके अलावा इसकी जड़ के चूर्ण को दही या छाछ के साथ लेने से बवासीर में भी लाभ होता है।

घाव के उपचार हेतु और कीड़े-मकोड़े के काटने पर-

अनंतमूल के पत्तों को तेल में पकाकर अंगुली के बीच वाले और अन्य घावों पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होते हैं। इसके अलावा किसी कीड़े-मकोड़े के काटने पर अनंतमूल पंचांग को पीसकर लगाने से उस कीड़े के जहर का असर कम हो जाता है।

पथरी और गठिया की समस्या के लिए-

पथरी की समस्या होने पर अनंतमूल जड़ के चूर्ण का सेवन दूध के साथ करने से पथरी की समस्या ठीक होने लगती है। वहीं अनंतमूल और इसकी जड़ को पीसकर तैयार किए गए लेप को गठिया और जोड़ों पर लगाने से गठिया रोग और जोड़ों के दर्द में आराम लगता है।

कहां पाई जाती है अनन्तमूल?

अनन्तमूल की बेल समुद्र के किनारे वाले प्रदेशों से लेकर हिमालयी क्षेत्रों में 1200 मीटर की ऊंचाई तक प्रचुरता में मिलती है। इसके अलावा केरल, तमिलनाडु, असम, बंगाल आदि क्षेत्रों में भी अनन्तमूल के पौधे को देखा जा सकता है।


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